रांची, पांच अगस्त (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे देवेंद्र नाथ महतो से बुधवार को बातचीत की और उनसे पानी पीने की अपील की।
वांगचुक की अपील मानते हुए महतो ने अपने अनशन के चौथे दिन पानी पिया। इस बीच, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सुधार मंच के बैनर तले पांच अन्य लोगों ने मंगलवार रात से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। विधानसभा के बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले आंदोलन तेज हो गया है।
इसके साथ ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है।
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो पिछले चार दिनों से इसी स्थान पर अनशन कर रहे हैं।
हाल में दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर 26 दिन का अनशन कर चुके वांगचुक ने महतो को सलाह दी कि उनका रक्त शर्करा और रक्तचाप का स्तर लगातार गिर रहा है, इसलिए कम से कम पानी अवश्य पिएं। उनकी सलाह पर महतो ने पानी पिया।
प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा रद्द करने, आयोग तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में सुधार लागू करने की 25 जुलाई से मांग कर रहे हैं।
वे परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या राज्य से बाहर के उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराने की भी मांग कर रहे हैं।
जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने कहा, ‘‘हमारी मांगों के समर्थन में मंगलवार रात से दो महिलाओं सहित हमारे पांच साथी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।’’
उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों के समर्थन में ‘तिरंगा मार्च’ निकालने पर निर्णय लेने के लिए जल्द ही कोर समिति की बैठक होगी।
भूख हड़ताल कर रहीं सबिता कुमारी ने कहा कि सरकार उनकी मांगें नहीं मान रही है, इसलिए उन्हें इस प्रकार का आंदोलन करने के लिए ‘‘मजबूर’’ होना पड़ा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी हबीबा ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक जैसे हैं। जब बच्चे भूखे होते हैं तो अभिभावकों को भी पीड़ा होती है। इसलिए हमें उम्मीद है कि वह हमारी शिकायतों और मांगों पर ध्यान देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री कहते हैं कि सरकार संवेदनशील है। हो सकता है, लेकिन हमें आश्वासन नहीं, कार्रवाई और न्याय चाहिए।’’
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कहा था कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
सोरेन ने रांची में संवाददाताओं से कहा था, ‘‘पूरी गंभीरता और गहन जांच के साथ उनकी मांगों और सवालों पर उचित समय पर निर्णय की घोषणा की जाएगी। मुझे विश्वास है कि प्रदर्शनकारियों की चिंताओं का समाधान होगा।’’
वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करनी चाहिए और मामले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय कुमार ने झारखंड सरकार से कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने, जेपीएससी के सभी अधिकारियों को हटाने और हाल में आयोजित परीक्षाओं के परिणाम रद्द करने की मांग की।
हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस प्रमुख सहयोगी दल है।
एक अधिकारी ने बताया कि कथित अनियमितताओं के मामले में झारखंड पुलिस का अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है। बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच जेपीएससी ने ‘‘अपरिहार्य परिस्थितियों’’ का हवाला देते हुए 25 से 27 जुलाई तक प्रस्तावित संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी थी।
सीआईडी ने 28 जुलाई से अब तक जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते से चार बार पूछताछ की है और जांच के सिलसिले में रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की है।
भाषा शोभना नरेश
नरेश