कोलकाता, 13 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मुख्यालय ‘खाद्य भवन’ के बाहर शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया जब लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की मांग को लेकर चल रहे ‘कार्य बहिष्कार’ आंदोलन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपने सहकर्मियों को कथित तौर पर कार्यालय में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की।
राज्य सरकार पर डीए के बकाये के भुगतान और इस मुद्दे पर हाल में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को लागू करने का दबाव बनाने के लिए ‘संग्रामी संयुक्त मंच’ ने इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।
मंच के नेता भास्कर घोष ने दावा किया कि राज्य सरकार के अधिकांश कर्मचारियों ने काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, उनसे प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन के समर्थन में काम से दूर रहने की अपील की।
घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने काम पर आने वालों को लाल गुलाब देकर आज कार्यालय में प्रवेश न करने का अनुरोध किया। कई लोगों ने हमारी अपील मान ली जबकि जिन्होंने नहीं मानी, उन्होंने अपने विवेक के अनुसार काम किया।’’
उन्होंने इन आरोपों से भी इनकार किया कि प्रदर्शनकारियों ने फ्री स्कूल स्ट्रीट स्थित परिसर में वाहनों के प्रवेश को रोका। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ‘उकसावे की कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस समर्थक कुछ सरकारी कर्मचारियों’ ने की।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस से संबद्ध राज्य सरकार कर्मचारी संघ के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि आंदोलन के बावजूद कार्यालयों में उपस्थिति ‘100 प्रतिशत’ रही। उन्होंने कहा कि कर्मचारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘जनहितैषी और सरकार समर्थक नीतियों’ का समर्थन करते हैं।
मंच के सदस्यों ने बहरामपुर, बांकुड़ा, बारासात, मालदा और मिदनापुर समेत कई जिलों में भी सरकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और सहकर्मियों से काम से दूर रहने की अपील की।
मंच के अनुसार, आंदोलन में शामिल कर्मचारी विरोध के तौर पर दिनभर सरकारी कामकाज से दूर रहेंगे।
‘संग्रामी संयुक्त मंच’ का आरोप है कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके केंद्रीय सरकारी समकक्षों के बराबर डीए देने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को लागू करने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
मंच ने यह भी दावा किया कि अदालत ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच के डीए बकाये का 25 प्रतिशत भुगतान 31 मार्च तक करने का निर्देश दिया था, लेकिन इस संबंध में अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस बीच, पश्चिम बंगाल के वित्त विभाग ने एक ज्ञापन जारी कर शुक्रवार को राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों के लिए कार्यालय में उपस्थिति अनिवार्य कर दी।
राज्य सरकार और कर्मचारियों के एक वर्ग के बीच डीए समानता को लेकर विवाद कई वर्षों से जारी है। कर्मचारी 2008 से लंबित बकाये के भुगतान और केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के बराबर डीए की मांग कर रहे हैं।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने हड़ताली कर्मचारियों को समर्थन दिया है।
भाषा सिम्मी शोभना नरेश
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