Vande Bharat: शाह का ‘पत्र’, ममता का ‘मंत्र’, बंगाल में किसका चलेगा तंत्र, भाजपा ने जारी किया भरोसे का पत्र, क्या मिल गया ममता बनर्जी के लक्ष्मी भंडार’ का तोड़?
West Bengal Assembly Election 2026: शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में भाजपा का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया।
West Bengal Assembly Election 2026|| Image- ANI News File
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में भाजपा का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया।
- इसे नाम दिया गया है-'भरोसे का पत्र।'
- भाजपा ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी के 'लक्ष्मी भंडार' की काट ढूंढ ली है।
West Bengal Assembly Election 2026: नई दिल्ली: बंगाल की सियासी रणभेरी बज चुकी है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में भाजपा का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया। इसे नाम दिया गया है-‘भरोसे का पत्र।’ भाजपा ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी के ‘लक्ष्मी भंडार’ की काट ढूंढ ली है।
भाजपा सीधे तौर पर ज्यादा नकद लाभ (जैसे 3,000 रु महिला/बेरोजगारी भत्ता), 45 दिनों में 7वां वेतन आयोग और UCC जैसे नीतिगत बदलावों के जरिए ‘परिवर्तन” का वादा कर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं (जैसे लक्ष्मी भंडार और स्वास्थ्य साथी) के विस्तार और बंगाल की क्षेत्रीय पहचान को केंद्र में रखकर जनता का भरोसा बनाए रखने की कोशिश कर रही है। (West Bengal Assembly Election 2026) संक्षेप में, भाजपा का जोर बड़े वित्तीय वादों और केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन पर है, जबकि TMC का ध्यान अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के निरंतर सशक्तिकरण पर है।
West Bengal Assembly Election 2026: लेकिन दीदी के गढ़ में सेंध लगाना इतना आसान नहीं है। नॉर्थ 24 परगना की रैली में ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने जनता को आगाह किया कि, भाजपा पर भरोसा करना ‘सांप पर भरोसा करने’ जैसा है। ममता ने आरोप लगाया कि, भाजपा के पास अपने वोट नहीं हैं, इसलिए वो बाहरी राज्यों से लोगों को लाकर चुनाव जीतना चाहती है।
इधर दिल्ली की सियासत भी बंगाल पर गर्म है.. (West Bengal Assembly Election 2026) कांग्रेस ने भाजपा के वादों को ‘चुनावी जुमला’ बताते हुए कहा कि, जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां भी उनके संकल्प अधूरे हैं।
West Bengal Assembly Election 2026: तो मुकाबला अब आर-पार का है, एक तरफ भाजपा का ‘भरोसे का पत्र’ है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी की ‘क्षेत्रीय अस्मिता’ और पुरानी योजनाओं का कवच.. 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तभी साफ होगा कि बंगाल ने किस पर भरोसा जताया है।
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