पश्चिम बंगाल : एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाए गए

पश्चिम बंगाल : एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाए गए

पश्चिम बंगाल : एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाए गए
Modified Date: April 7, 2026 / 04:36 pm IST
Published Date: April 7, 2026 4:36 pm IST

कोलकाता, सात अप्रैल (भाषा) निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के बाद मतदाता सूची से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के अंतिम मतदाता आधार की घोषणा अभी बाकी है।

हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर के अंत में 7.66 करोड़ मतदाताओं के आधार पर, राज्य में इस समय कुल हटाए गए मतदाताओं का प्रतिशत 11.85 प्रतिशत से अधिक है।

एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत से अब तक कुल हटाए गए नामों की अंतिम संख्या 90.83 लाख से थोड़ा अधिक रही।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई जांच में इन 60.06 लाख में से 27.16 लाख ‘विवेचनाधीन’ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।

आंकड़ों से पता चलता है कि 28 फरवरी को एसआईआर के बाद प्रकाशित मतदाता सूचियों के बाद न्यायिक जांच के दायरे में आए लगभग 45.22 प्रतिशत नाम हटा दिए गए।

वहीं, इस श्रेणी के 32.68 लाख से अधिक मतदाताओं को बरकरार रखते हुए अंतिम सूची में शामिल किया गया है।

आयोग के आंकड़ों से पता चला कि सबसे अधिक नाम मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हटाए गए, जहां न्यायिक जांच के तहत 11.01 लाख नामों में से 4.55 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस तरह, जिले में न्यायिक जांच के तहत हटाए गए नामों की संख्या लगभग 41.33 प्रतिशत है।

बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24 परगना जिले में भी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए गए। यहां जांच के दायरे में आए 5.91 लाख मतदाताओं में से 3.25 लाख से अधिक मतदाता अयोग्य पाए गए। मालदा में, न्यायिक जांच के दायरे में आए 8.28 लाख मतदाताओं में से 2.39 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।

आंकड़ों के अनुसार, सुनवाई के बाद दक्षिण 24 परगना जिले में हटाए गए नामों की संख्या लगभग 2.23 लाख रही, पूर्वी बर्धमान जिले में 2.09 लाख और नदिया में 2.98 लाख रही।

प्रतिशत के हिसाब से, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में सुनवाई के बाद हटाए गए सदस्यों की संख्या क्रमशः 77.86 प्रतिशत और 55.08 प्रतिशत है। इन दोनों जिलों में हिंदू नामशुद्र मतुआ समुदाय के सदस्यों की अच्छी खासी संख्या है।

कोलकाता दक्षिण में 28,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। सुनवाई के दौरान हटाए गए नामों का प्रतिशत 36.19 प्रतिशत रहा।

कोलकाता उत्तर में जांच के दायरे में आए करीब 39,000 मतदाता मतदान के लिए अयोग्य पाए गए, जिससे वहां हटाए गए नामों का प्रतिशत लगभग 64 प्रतिशत रहा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से मतदाताओं की संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गया। 7.04 करोड़ के मतदाता आधार में 60.06 लाख से अधिक मतदाता ऐसे थे, जिन्हें ‘विवेचनाधीन’ श्रेणी में रखा गया था।

अंतिम मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद मतदाताओं के पास उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत राज्य में विशेष रूप से गठित न्यायाधिकरणों में जाने का विकल्प है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि न्यायाधिकरण के न्यायाधीशों द्वारा योग्य पाए गए मतदाता आगामी चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं।

निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘पुनरीक्षण प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है। पूर्ण जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अब जिला-वार आंकड़े सार्वजनिक कर दिए गए हैं।’’

उन्होंने बताया कि 60.06 लाख ‘विवेचनाधीन’ मतदाताओं में से 59.84 लाख का डेटा सार्वजनिक किया जा चुका है, जबकि शेष 22,163 मामलों का निस्तारण हो चुका है, लेकिन अभी ई-हस्ताक्षर होना बाकी है।

अधिकारी ने कहा, “ई-हस्ताक्षर सहित समस्त लंबित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नाम हटाने और जोड़ने के आंकड़ों में मामूली बदलाव संभव है।”

उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है और इस चरण पर किसी भी नए नाम को शामिल करना कानूनी प्रावधानों तथा सक्षम प्राधिकरण के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

इस बीच, आखिरी पूरक सूची जारी होने के साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदाता सूची सोमवार आधी रात के बाद नियमों के अनुसार अंतिम रूप दे दी गई है।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा, जबकि शेष 142 सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे। दूसरे चरण के लिए मतदाता सूची को नौ अप्रैल को अंतिम रूप दिया जाएगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “इस चरण में मतदाता सूची में कोई और नाम शामिल नहीं किया जाएगा। पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि के बाद सूची कानून के अनुसार आखिरी हो चुकी है।”

उन्होंने कहा कि अब किसी भी बदलाव का फैसला उच्चतम न्यायालय के संभावित निर्देशों पर निर्भर करेगा। एसआईआर मामले पर उच्चतम न्यायालय अगली सुनवाई 13 अप्रैल को करेगा।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश


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