सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- कोरोना के चलते आखिरी मौका गंवाने वाले UPSC उम्मीदवारों को क्यों नहीं एक और अवसर दिया जाए?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- कोरोना के चलते आखिरी मौका गंवाने वाले UPSC उम्मीदवारों को क्यों नहीं एक और अवसर दिया जाए?
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से सवाल किया कि सिविल सेवा के इच्छुक ऐसे उम्मीदवारों को क्यों नहीं एक और मौका दिया जाए जो 2020 में कोरोना वायरस महामारी के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सके और यह उनका आखिरी प्रयास था। न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को एक फरवरी तक यह बताने को कहा कि अगर एक बार की छूट दी जाती है तो कितने उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होंगे। पीठ ने यह भी सवाल किया कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की स्थापना के बाद से ऐसा कितनी बार किया गया है।
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पीठ ने राजू से कहा, ‘यह सिर्फ एक बार की छूट है और अगर ऐसा पहले किया गया है तो इस बार क्यों नहीं किया जा सकता है।’’ उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से एक फरवरी तक 2021 की यूपीएससी परीक्षा के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं करने को कहा। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि वह उम्मीदवारों की आयु-सीमा बढ़ाने के लिए नहीं कह रही है लेकिन उन लोगों को एक बार के लिए छूट दिए जाने का अनुरोध किया जा रहा है जिनके सभी मौके समाप्त हो गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और अधिवक्ता अनुश्री पी कपाडिया याचिकाकर्ता रचना और अन्य की ओर से पेश हुए जो यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उन उम्मीदवारों को एक और मौका देने का अनुरोध कर रहे हैं जो महामारी के कारण 2020 में परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए और वह उनका आखिरी मौका था।
न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से यूपीएससी सिविल परीक्षा मामले में उसके द्वारा दाखिल हलफनामे को लेकर सवाल किया था कि इसमें यह नहीं बताया गया है कि किस स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि यूपीएससी सिविल सेवा के उन अभ्यर्थियों को एक और अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा जो कोविड-19 महामारी के कारण, अपने अंतिम प्रयास में 2020 की परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे।
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