केरलम की महिला विधायकों ने हिंदी में सत्र के आयोजन के विरोध में एनसीडब्ल्यू की कार्यशाला छोड़ी
केरलम की महिला विधायकों ने हिंदी में सत्र के आयोजन के विरोध में एनसीडब्ल्यू की कार्यशाला छोड़ी
नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, आठ सितंबर (भाषा) केरलम की महिला विधायकों के एक समूह ने मंगलवार को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की एक कार्यशाला का समापन से पहले ही बहिष्कार कर दिया। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा कि कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिंदी में बातचीत की जा रही थी, जिसे समझने में उन्हें कठिनाई हो रही थी।
एनसीडब्ल्यू ने फरीदाबाद में महिला विधायकों के लिए दो दिवसीय दक्षता विकास कार्यशाला का आयोजन किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कार्यशाला का उद्घाटन किया।
केरलम की महिला विधायकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम हिंदी में आयोजित किए जाने के कारण गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आईं प्रतिभागियों के लिए सत्र को समझना और उनमें शामिल होना मुश्किल हो गया।
केरलम विधानसभा की उपाध्यक्ष शानिमोल उस्मान ने कहा, ‘‘हम इस उम्मीद के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए थे कि विधायकों के तौर पर हमें विधायी कार्यवाही में प्रभावी ढंग से भाग लेने के तरीके को लेकर कुछ नए सुझाव और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलेगा।’’
उस्मान के अलावा केरल की महिला जनप्रतिनिधियों में मंत्री बिंदु कृष्णा और के. ए. तुलसी तथा विधायक के. के. रेमा, फातिमा तहलिया, विद्या बालकृष्णन और उषा विजयन शामिल थीं।
उस्मान ने कहा कि सभी सत्र पूरी तरह हिंदी में आयोजित किए गए, जिससे केरलम की विधायक इस भाषा को समझ नहीं सकीं।
उन्होंने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आमतौर पर जब राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं तो भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के प्रतिभागियों के लिए कुछ विशेष व्यवस्था की जाती है। लेकिन यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी।’’
उनके आरोपों पर राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
फातिमा तहलिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि कार्यक्रम में बातचीत की गुंजाइश बहुत कम थी, क्योंकि खुले तौर पर चर्चा के लिए कोई सत्र आयोजित किए बिना लगातार कक्षाएं चलती रहीं।
विधायक ने कहा, ‘‘जब इसी तरह के सत्र आगे भी जारी रहे तो हमने कुछ सवाल और अपनी चिंताएं सामने रखीं।’’
केरलम की विधायकों ने आरोप लगाया कि विरोध जताए जाने के बावजूद राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष इस पर खामोश रहीं।
एक विधायक ने कहा, ‘‘समस्या हिंदी भाषा नहीं है। बल्कि समस्या यह है कि आयोग ने राष्ट्रीय स्तर पर सभी विधायकों को शामिल करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।’’
विधायकों ने आरोप लगाया कि हिंदी भाषी राज्य की एक विधायक ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे हिंदी नहीं जानती हैं तो वह उन्हें हिंदी सिखा सकती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर भारत की कुछ विधायकों ने चिल्लाकर कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा है और चर्चा केवल हिंदी में ही होगी। उन्होंने कहा कि बाद में सभागार में ‘‘जय श्री राम’’ और ‘‘भारत माता की जय’’ जैसे नारे भी लगाए गए।
उन्होंने बताया कि इसके बाद केरलम की सदस्यों ने एक सत्र और समापन समारोह से ठीक पहले कार्यक्रम से बाहर निकलने का फैसला किया।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

Facebook


