दुनिया भारत को बेंगलुरु के नजरिए से देखती है : शिवकुमार

दुनिया भारत को बेंगलुरु के नजरिए से देखती है : शिवकुमार

दुनिया भारत को बेंगलुरु के नजरिए से देखती है : शिवकुमार
Modified Date: January 25, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: January 25, 2026 4:14 pm IST

(फोटो के साथ)

बेंगलुरु, 25 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने रविवार को कहा कि आज दुनिया बेंगलुरु के नजरिए से भारत को देख रही है, जो देश के विकास और युवाओं में वैश्विक विश्वास को रेखांकित करता है।

दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक से लौटने पर यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला देश है। लोगों को इस देश के युवाओं पर बहुत भरोसा है। विश्व नेता बेंगलुरु के नजरिए से भारत को देख रहे हैं। इस शहर में फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से अधिकांश के कार्यालय हैं।’

शिवकुमार ने कहा कि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड और असम सहित 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कई राज्य सरकारों के प्रमुखों के साथ शिखर सम्मेलन में भाग लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘65 देशों ने भाग लिया था। एलन मस्क जैसे बड़े कारोबारी भी मौजूद थे। लगभग 100 बैठकें हुईं और नयी नीतियों पर चर्चा की गई।’’

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस में हुई चर्चाओं में डेटा सेंटर, वैश्विक दक्षता केंद्र, खाद्य और पेय पदार्थ, विमानन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स, और साथ ही 2047 तक भारत में विशेष रूप से बेंगलुरु में शहरीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

यूरोप में अपने यात्रा अनुभव का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि अवसंरचना योजना और नागरिक अनुशासन उल्लेखनीय थे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने जानबूझकर दावोस में किसी भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर न करने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने वहां किसी भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर न करने का फैसला किया क्योंकि हम चाहते हैं कि विदेशी निवेशक यहां आएं और हमारे उपलब्ध संसाधनों, क्षमताओं, पर्यावरण, स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण स्तर, प्रतिभा की उपलब्धता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटर की आवश्यकताओं को देखें।’’

उन्होंने कहा कि निवेशकों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने के लिए छोटे शहरों में निवेश करने में रुचि दिखाई है। उन्होंने कहा, ‘‘वे चाहते हैं कि ये शहर जीवंत हों। युवाओं को वहां रोजगार मिलना चाहिए और उन्हें बड़े शहरों में आने से बचना चाहिए।’’

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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