यतींद्र मिश्र जेएलएफ में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित

यतींद्र मिश्र जेएलएफ में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित

यतींद्र मिश्र जेएलएफ में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित
Modified Date: January 17, 2026 / 03:29 pm IST
Published Date: January 17, 2026 3:29 pm IST

जयपुर, 17 जनवरी (भाषा) कवि, संपादक और संगीत अध्येता यतींद्र मिश्र को यहां 19वें जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) में 11वें महाकवि कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

जेएलएफ के आयोजक एवं ‘टीमवर्क आर्ट्स’ के संजय के. रॉय ने यहां एक सत्र में यतींद्र मिश्र को सर्वसम्मति से इस पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा की। इसके बाद इस्कॉन से जुड़े गौर गोपाल दास ने उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया।

यतींद्र मिश्र को उनके काव्य संग्रह ‘बिना कलिंग विजय’ के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

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मिश्र के अब तक तीन कविता-संग्रह प्रकाशित हुए हैं— ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएं’, ‘यदा-कदा’, और ‘ड्योढ़ी पर आलाप’। इसके अलावा उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत साधना पर एक ‘गिरिजा’ नामक पुस्तक भी लिखी है। उन्होंने रीतिकाल के अंतिम प्रतिनिधि कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का वर्ष 2000 में सह-संपादन किया था। उन्होंने कुंवर नारायण पर आधारित दो पुस्तकों और ‘स्पिक मैके’ के लिए विरासत 2001 के कार्यक्रम के लिए भी संपादन किया है।

लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा’ पुस्तक उनकी एक और चर्चित कृति है, जिसके लिए उन्हें 64वां राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

पुरस्कार चयन समिति में नमिता गोखले, संजय के. रॉय, सुकृत पाल कुमार, रंजीत होसकोटे सिद्धार्थ सेठिया और जयप्रकाश सेठिया शामिल रहे।

इससे पहले अरुंधती सुब्रमण्यम, के. सच्चिदानंदन और रंजीत होसकोटे को कन्हैया लाल सेठिया पुरस्कार मिल चुका है।

कन्हैयालाल सेठिया का जन्म राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ था। प्रसिद्ध राजस्थानी गीत ‘आ तो सुरगा नै सरमावै, ई पै देव रमण नै आवे’ इन्हीं की रचना है। उनका 11 नवम्बर 2008 को निधन हो गया था।

वह राजस्थानी भाषा के प्रसिद्ध कवि थे। उन्हें 2004 में पद्मश्री,

साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा 1988 में ज्ञानपीठ के मूर्तिदेवी साहित्य

पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

भाषा नरेश

देवेंद्र

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