गोपेश्वर: उत्तराखंड के चमोली जिले की एक अदालत ने बुधवार को एक युवक को अपनी नाबालिग चचेरी बहन से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। चमोली के जिला जज एवं विशेष सत्र न्यायधीश नरेन्द्र दत्त ने 35 वर्षीय वीरेंद्र लाल पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इसी साल जनवरी में 11 वर्षीय पीड़िता की मां ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि उसके सगे जेठ के पुत्र ने उसकी अनुपस्थिति में उसकी पुत्री के साथ दुष्कर्म किया था। नाबालिग पीड़िता गर्भवती भी हो गयी थी। जिला न्यायालय ने 10 महीने से भी कम समय में इस मामले में कार्यवाही पूरी कर दोषी को दंडित किया है। अपने निर्णय में जिला सत्र न्यायालय ने पीड़िता की शिक्षा एवं पुनर्वास के लिए राज्य सरकार के नियमों के तहत सात लाख रुपये की राशि देने का भी आदेश दिया है। इसके साथ ही दोषी पर लगाया गया जुर्माना भी पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया है।
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अदालत के निर्णय की जानकारी देते हुए चमोली के विशेष लोक अभियोजक मोहन पंत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह पहला मामला है जिसमें प्रतिकर के रूप में अधिकतम दी जाने वाली राशि सात लाख रुपये पीड़िता को दिए जाने का फैसला सुनाया गया है। उन्होंने बताया कि दोषी पर लगाया गया 50 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी पीड़िता को दिया जाएगा।