युवाओं के पक्के इरादे ने मंत्री को पद छोड़ने पर मजबूर किया: आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थी के पिता

युवाओं के पक्के इरादे ने मंत्री को पद छोड़ने पर मजबूर किया: आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थी के पिता

युवाओं के पक्के इरादे ने मंत्री को पद छोड़ने पर मजबूर किया: आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थी के पिता
Modified Date: July 26, 2026 / 02:54 pm IST
Published Date: July 26, 2026 2:54 pm IST

लखीमपुर खीरी (उप्र), 26 जुलाई (भाषा) लखीमपुर खीरी जिले में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शामिल होने के बाद आत्महत्या करने वाले 21 वर्षीय अभ्यर्थी के दुखी पिता ने नयी दिल्ली में जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि कोई भी मुआवजा उनके बेटे की कमी को पूरा नहीं कर सकता, लेकिन देश भर के दूसरे युवाओं को इससे फायदा होगा।

खीरी निवासी अनूप मिश्रा (46) ने बताया कि उनका बेटा रितिक मिश्रा पेपर लीक के कारण नीट परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव नहीं झेल सका। वह तीसरी बार इस परीक्षा में शामिल हुआ था और पूरी तरह निराश होकर उसने 14 मई को आत्महत्या कर लिया।

लखनऊ के एक अस्पताल में अपनी बीमार पत्नी का उपचार करा रहे अनूप मिश्रा ने फोन पर बातचीत में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में युवाओं के बड़े आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी।

मौजूदा परीक्षा प्रणाली की ओर पूरे देश का ध्यान खींचने की युवाओं की इच्छाशक्ति की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं के पक्के इरादे ने ही मंत्री को दबाव में आकर अपना पद छोड़ने पर मजबूर किया।

केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का स्वागत करते हुए अनूप मिश्रा ने कहा, ‘अगर केंद्रीय मंत्री ने पहले ही इस्तीफा दे दिया होता, तो हमारी युवा पीढ़ी पर हुए इस जुल्म को रोका जा सकता था।’

पिता ने राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, ‘युवा पीढ़ी ने अपने पक्के इरादे और अटूट इच्छाशक्ति से सरकार को भविष्य की पीढ़ियों के फायदे के लिए शिक्षा प्रणाली को फिर से व्यवस्थित करने के लिए मजबूर किया है।’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बरता देखना दिल तोड़ने वाला था। ये युवा सिर्फ एक पारदर्शी प्रणाली के लिए लड़ रहे थे।’

इस आंदोलन के बड़े असर पर बात करते हुए पिता ने कहा, ‘यह देखना बहुत दुखद है कि इन बदलावों को देखने के लिए मेरा बेटा अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन इस आंदोलन से देश भर के दूसरे युवाओं को फायदा होगा।’

उन्होंने कहा, ‘अगर इस आंदोलन से परीक्षा प्रणाली में सकारात्मक सुधार आते हैं और छात्र अवसाद से बचते हैं, और अन्य परिवार उस भयानक त्रासदी से बच जाते हैं जिसका हमने सामना किया है, तो हमें कुछ हद तक तसल्ली मिलेगी।’

आत्महत्या करने वाले नीट के 21 अभ्यर्थियों के परिवारों को अधिक से अधिक आर्थिक मुआवजा देने के आश्वासन पर पिता ने कहा, ‘‘कोई भी मुआवजा उस कमी को पूरा नहीं कर सकता जो उनके बेटे की मौत से पैदा हुई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे परिवार मैं, मेरी पत्नी और हमारी बड़ी बेटी ने जो दर्द, तनाव और दुख सहा है, उसकी भरपाई किसी भी रकम से नहीं की जा सकती।’’

भाषा सं आनन्द संतोष

संतोष


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