भूमि और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों की पड़ताल करती है कला प्रदर्शनी ‘जमीन’

भूमि और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों की पड़ताल करती है कला प्रदर्शनी 'जमीन'

भूमि और उससे जुड़े सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों की पड़ताल करती है कला प्रदर्शनी ‘जमीन’
Modified Date: January 7, 2026 / 06:24 pm IST
Published Date: January 7, 2026 6:24 pm IST

कोलकाता, सात जनवरी (भाषा) बिरला कला एवं संस्कृति अकादमी के 59वें वार्षिक समारोह में आयोजित एक समूह प्रदर्शनी में ज़रीना हाशमी, मिथु सेन, बीरेंद्र यादव और सुमेध राजेन्द्रन सहित समकालीन भारतीय कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। प्रदर्शनी में ज़मीन को विरासत, संसाधन, स्मृति और संघर्ष के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

कोलकाता में 9 जनवरी से शुरू हो रही प्रदर्शनी ‘ज़मीन’ विविध माध्यमों और व्यक्तिगत कथाओं के ज़रिये यह पड़ताल करेगी कि बढ़ते राजनीतिक और पर्यावरणीय संकट के दौर में भूमि किस तरह पहचान, श्रम, पारिस्थितिकी और सामूहिक जीवन को आकार देती है।

प्रदर्शनी की ‘क्यूरेटर’ इना पुरी ने कहा, “इस प्रदर्शनी का मकसद यह दिखाना है कि कलाकार जमीन और उससे जुड़े अपनेपन के बदलते अर्थों के गवाह हैं। जरीना हाशमी से लेकर विक्रांत भिसे तक और दूर-दराज के इलाकों से आए कई कलाकार इसमें शामिल होंगे।”

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“डेब्रिस ऑफ फेट” (2015) नामक कलाकृति में कलाकार यादव ने निर्माण कार्य से निकले कचरे को जोड़कर सुंदर-सी आकृतियां बनाई हैं। इन आकृतियों में काम के औजारों के निशान दिए गए हैं, जो समाज में छिपी हिंसा, शोषण और लोगों को भुला दी गई सच्चाई को दिखाते हैं।

वहीं, देबाशीष मुखर्जी की कृति ‘फोर्टी फाइव अटेम्प्ट्स एट रिमेम्बरिंग ए फैमिलियर लैंड’ (2025) स्मृति और पुनरावृत्ति के माध्यम से वाराणसी के बदलते भू-दृश्य को रेखांकित करती है।

प्रदर्शनी और वार्षिक समारोह दोनों का समापन आठ फरवरी को होगा।

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश


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