Pig Sperm Cancer Treatment News : सूअर के स्पर्म की अचानक क्यों बढ़ी चर्चा? डॉक्टर अब इस गंभीर बीमारी के इलाज में कर रहे इस्तेमाल
स्पर्म से निकले एक्सोसोम पर आधारित आई ड्रॉप बच्चों में होने वाले आंखों के कैंसर Retinoblastoma के इलाज में नई उम्मीद बन सकती है। शुरुआती पशु परीक्षणों में यह तकनीक ट्यूमर को काफी हद तक कम करने में सफल रही है।
Pig Sperm Cancer Treatment News / Image Source : GOOGLE
- सूअर के स्पर्म से निकले एक्सोसोम दवा को आंख के भीतर पहुंचाने में सक्षम पाए गए।
- चूहों पर परीक्षण में ट्यूमर का आकार लगभग 98% तक घटा।
- अभी यह तकनीक केवल पशु परीक्षण स्तर पर है, इंसानों पर ट्रायल बाकी है।
नई दिल्ली : Pig Sperm Cancer Treatment News कैंसर जैसी लाइलाज और घातक बीमारियों को हराने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए शोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक चौंकाने वाला शोध सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि सूअर के स्पर्म का इस्तेमाल आंखों के कैंसर, विशेष रूप से बच्चों में होने वाले रेटिनोब्लास्टोमा (RB) के इलाज के लिए किया जा सकता है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, साइंस एडवांसेज में प्रकाशित यह अध्ययन पारंपरिक दर्दनाक इलाजों जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन के विकल्प के रूप में एक सुरक्षित मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
क्या है रेटिनोब्लास्टोमा और यह तकनीक कैसे काम करती है?
रेटिनोब्लास्टोमा आंखों के कैंसर का एक खतरनाक रूप है जो मुख्य रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाता है। Eye Cancer Cure Research इसका मौजूदा इलाज इंजेक्शन और कीमो न केवल दर्दनाक है, बल्कि इससे आंखों की रोशनी जाने का खतरा भी रहता है।
सूअर के स्पर्म का कमाल
सूअर के स्पर्म में मौजूद कोशिकाओं से छोटे वेसिकल निकलते हैं जिन्हें एक्सोसोम कहा जाता है। ये जैविक बाधाओं को पार करने में सक्षम होते हैं, जिससे ये दवा को शरीर के अंदर ले जाने वाले कैरियर बन जाते हैं। शोधकर्ताओं ने इन एक्सोसोम को फोलिक एसिड और विशेष नैनोजाइम प्रणाली के साथ मिलाकर एक आई ड्रॉप तैयार की है। फोलिक एसिड सीधे कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाता है, जिससे स्वस्थ टिशू सुरक्षित रहते हैं और केवल प्रभावित हिस्सा ही नष्ट होता है।
अभी किस स्तर पर है यह शोध?
वर्तमान में इस तकनीक का सफल परीक्षण चूहों पर किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह आई ड्रॉप कॉर्निया और पलकों के बीच की पतली झिल्ली के जरिए आसानी से आंख में प्रवेश कर दवा पहुंचा सकती है। हालांकि, इंसानों पर इसके इस्तेमाल से पहले अभी कई और गहन शोध और ह्यूमन ट्रायल होना बाकी है, जिसके बाद ही इसे बाजार में एक दवा के रूप में उतारा जा सकेगा।अगर यह शोध सफल रहता है, तो भविष्य में बच्चों को कैंसर के दर्दनाक इंजेक्शनों से मुक्ति मिल सकती है।
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