Bengal Assembly Elections: बंगाल के 34 लाख लोगों को एक और बड़ा झटका, चुनाव में नहीं डाल सकेंगे वोट, SC ने कहा- हम नहीं दे सकते ऐसी अनुमति

बंगाल के 34 लाख लोगों को एक और बड़ा झटका, चुनाव में नहीं डाल सकेंगे वोट, 34 lakh people not vote in Bengal

Bengal Assembly Elections: बंगाल के 34 लाख लोगों को एक और बड़ा झटका, चुनाव में नहीं डाल सकेंगे वोट, SC ने कहा- हम नहीं दे सकते ऐसी अनुमति

Bengal Assembly Elections. Image Source- IBC24 Archive

Modified Date: April 13, 2026 / 06:51 pm IST
Published Date: April 13, 2026 6:45 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट ने लाखों मतदाताओं को वोटिंग की अनुमति देने से किया इनकार
  • 34 लाख से अधिक अपीलें मतदाता सूची से नाम कटने के खिलाफ दायर
  • चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने का हवाला देते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज की

नई दिल्ली। Bengal Assembly Elections: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम कटने वाले लाखों लोगों को बड़ा झटका देते हुए उन्हें आगामी चुनाव में मतदान की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी अनुमति देने से अपीलीय ट्रिब्यूनल पर अत्यधिक बोझ बढ़ेगा और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

Bengal Assembly Elections: सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 11 अप्रैल तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कुल 34 लाख 35 हजार 174 अपीलें दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि 23 अप्रैल को प्रस्तावित मतदान से पहले मतदाताओं को बिना किसी विकल्प के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। मले की सुनवाई के दौरान कल्याण बनर्जी ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं और इन मतदाताओं को इस महीने के अंत में होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनाव में मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लाखों लोग न्याय के लिए अदालत की ओर देख रहे हैं।

चीफ जस्टिस ने की अहम टिप्पणी

इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की अनुमति देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि हम ऐसा करते हैं, तो इससे वोटिंग प्रक्रिया पर असर पड़ेगा और कई लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।” णमूल कांग्रेस ने यह भी सुझाव दिया कि जिन व्यक्तियों के नाम 22 अप्रैल तक अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकार किए जाते हैं, उन्हें मतदान की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन अदालत ने इस पर सहमति नहीं जताई। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले में जुड़े न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में वापस न ली जाए, ताकि वे निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में अपना कार्य कर सकें।

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