Chabahar Port News: ट्रंप के दबाव में भारत ने छोड़ा इस पोर्ट से कंट्रोल? देश को हुआ करोड़ों का नुकसान? कांग्रेस के दावे की ये है असली हकीकत

अमेरिका ने ईरान को तोड़ने के लिए लगभग हर हथकंडा अपनाया है। कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, उसकी अर्थव्यवस्था को पंगु किया, उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए और उसके दुश्मनों को खुला समर्थन दिया

Chabahar Port News: ट्रंप के दबाव में भारत ने छोड़ा इस पोर्ट से कंट्रोल? देश को हुआ करोड़ों का नुकसान? कांग्रेस के दावे की ये है असली हकीकत
Modified Date: January 17, 2026 / 05:37 pm IST
Published Date: January 17, 2026 5:37 pm IST

नई दिल्लीः Chabahar Port News: अमेरिका ने ईरान को तोड़ने के लिए लगभग हर हथकंडा अपनाया है। कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, उसकी अर्थव्यवस्था को पंगु किया, उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए और उसके दुश्मनों को खुला समर्थन दिया। इसके अलावा ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने तक की धमकी दी है। इसी मसले को लेकर अब भारत में कांग्रेस समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया के साथ-साथ कई अन्य जगहों पर दावा किया है कि पीएम मोदी ने ट्रम्प के दबाव पर ईरान के चाबहार पोर्ट से कंट्रोल छोड़ दिया है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नरेंद्र मोदी ने एकबार फिर ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। ख़बरों के मुताबिक ट्रंप के दबाव में नरेंद्र मोदी ने ईरान के चाबहार पोर्ट से अपना कंट्रोल छोड़ दिया है, चुपके से वेबसाइट भी बंद करवा दी। इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में मोदी सरकार ने देश की जनता के 120 मिलियन डॉलर लगाए थे और अब ये सब स्वाहा हैं। जब चाबहार पोर्ट का एग्रीमेंट हुआ था तो नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इकोनॉमी से जुड़ा बहुत बड़ा काम हुआ है। ये मेरी बहुत बड़ी सफलता है। अब जब चाबहार पोर्ट का कंट्रोल छोड़ दिया है तो इसपर कुछ नहीं बोल रहे हैं। Chabahar bandargah kis desh mein sthit hai

 चाबहार कोई आम बंदरगाह नहीं- कांग्रेस

Chabahar Port News: कांग्रेस ने लिखा कि चाबहार कोई आम बंदरगाह नहीं है। यह भारत को अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से एक अहम और सीधा समुद्री रास्ता देता है, जिससे हम पाकिस्तान को बाईपास कर सकते हैं और चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का मुकाबला भी कर सकते हैं। लेकिन अफ़सोस की बात है कि नरेंद्र मोदी ट्रंप के दबाव के आगे झुक गए और देश का नुकसान कर दिया। कांग्रेस ने सवाल करते हुए लिखा कि भारत की विदेश नीति अमेरिका के व्हाइट हाउस से क्यों तय की जा रही है? नरेंद्र मोदी, अमेरिका को भारत पर दबाव बनाने की अनुमति क्यों दे रहे हैं?

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विदेश मंत्रालय ने दावों को किया खारिज (Chabahar port kiska hai)

कांग्रेस के इस आरोप को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान के चाबहार पोर्ट से जुड़ी योजनाएं जारी हैं। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए भारत, अमेरिका से बातचीत कर रहा है। अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार पोर्ट से जुड़े काम जारी रखने के लिए एक खास सैंक्शन की छूट दी है, जिसकी अवधि 26 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है।

फैक्ट चेकर संस्थानों ने भी किया चेक, Chabahar port kis desh mein hai

विदेश मंत्रालय के अलावा तथ्यों को जांच करने वाली कई संस्थाओं ने कांग्रेस के इस दावे को जांचा और इसे फेक करार दिया है। हालांकि इन संस्थानों ने विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयान का ही हवाला दिया है। DFRAC Official ने अपने एक्स पर लिखा कि DFRAC टीम के एनालिसिस में यह दावा फेक पाया गया। हमें भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का एक बयान मिला। उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए साफ किया कि अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने भारत को एक लेटर जारी किया है, जिसमें कंडीशनल छूट के लिए गाइडलाइंस बताई गई हैं। यह छूट भारत को 28 अक्टूबर, 2025 से 26 अप्रैल, 2026 तक छह महीने के लिए चाबहार पोर्ट को ऑपरेट करने की इजाज़त देती है। इसके अलावा, भरोसेमंद मीडिया सोर्स ने बताया है कि नई दिल्ली इस छूट को बढ़ाने या चाबहार पोर्ट में भारत के हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका की चिंताओं को दूर करने के लिए दूसरे ऑप्शन तलाशने के लिए वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है।

अफगानिस्तान को जरूरी सामान भेजता है भारत

पहले भारत को अफगानिस्तान माल भेजने के लिए पाकिस्तान से गुजरना पड़ता था, लेकिन सीमा विवाद के कारण यह मुश्किल था। चाबहार ने यह रास्ता आसान बनाया। भारत इस बंदरगाह से अफगानिस्तान को गेहूं भेजता है और मध्य एशिया से गैस-तेल ला सकता है। 2018 में भारत और ईरान ने चाबहार विकसित करने का समझौता किया था। अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को कुछ प्रतिबंधों में छूट दी थी। यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन बना रहा है, के मुकाबले भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।