शौर्य दिवस पर सिंधिया का संबोधन, लाहौर से लेकर आए सोमनाथ मंदिर का दरवाज़ा, हमारे पूर्वजों ने कराया काशीविश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण

Scindia on shaurya diwas in panipat: सिंधिया ने बताया कि कैसे उस वक्त के दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, जब उस मंदिर के द्वार लाहौर ले गए, तब वो उनके पूर्वज ही थे जिन्होंने लाहौर में मराठाओं का झंडा गाड़ा और सोमनाथ मंदिर के द्वार वापस लेकर आए।

शौर्य दिवस पर सिंधिया का संबोधन, लाहौर से लेकर आए सोमनाथ मंदिर का दरवाज़ा, हमारे पूर्वजों ने कराया काशीविश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण
Modified Date: January 14, 2024 / 05:48 pm IST
Published Date: January 14, 2024 5:48 pm IST

Scindia on shaurya diwas in panipat: पानीपत। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज पानीपत में 263वीं शौर्य दिवस के अवसर पर अपने पूर्वज सिंधिया व मराठा योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की । केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस दौरान बड़ा बयान दिया। आज पानीपत में आयोजित 263वें शौर्य दिवस पर जनसम्बोधन में बताया कि कैसे सोमनाथ मंदिर का दरवाज़ा लाहौर से लेकर आए और काशीविश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण उनके पूर्वजों ने कराया । 263वें शौर्य दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य के साथ CM मनोहर लाल खट्टर भी शामिल हुए।

सिंधिया ने बताया कि कैसे उस वक्त के दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, जब उस मंदिर के द्वार लाहौर ले गए, तब वो उनके पूर्वज ही थे जिन्होंने लाहौर में मराठाओं का झंडा गाड़ा और सोमनाथ मंदिर के द्वार वापस लेकर आए।

read more: क्या भाजपा के पास अपनी कोई प्रतिभा नहीं है : देवरा के इस्तीफे पर सुले ने किया सवाल

“मराठाओं ने ही कराया काशीविश्वनाथ का पुनर्निर्माण”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे कहा कि उनकी बशंज महारानी बैजाबाई, अहिल्याबाई होल्कर… मराठाओं ने दोबारा काशीविश्वनाथ को स्थापित करने का काम किया था। भारत की संस्कृति को उजागर करने का काम भी मराठा साम्राज्य ने किया। सिंधिया ने कहा कि आज मुझे गर्व है कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत, वसुधैव कुटुम्बकम्, विविधता में एकता की सोच और विचारधारा के साथ, भारत को केवल एक आर्थिक शक्ति नहीं बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति को भी विश्व पटल पर उजागर किया है।

263वां शौर्य दिवस का आयोजन

बता दें कि शौर्य स्मारक समिति ट्रस्ट पानीपत की ओर से 14 जनवरी को 263वां शौर्य दिवस आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम ऐतिहासिक देवी मंदिर में देवी तुलजा भवानी की पूजा की गयी और यहां से काला अंब तक शोभायात्रा निकाली गई। पानीपत के जिस देवी मंदिर में देवी तुलजा भवानी की मूर्ति स्थापित है, इसका निर्माण मराठों ने कराया था।आयोजन स्थल पर हरियाणवी और महाराष्ट्र के लोक संस्कृति के कार्यक्रम भी हुए। जिसमें मराठाओं की युद्ध कला का प्रदर्शन भी किया गया। इंडियन ऑयल के चेयरमैन श्रीकांत माधव वैद्य, कामनवेल्थ में गोल्ड मेडलिस्ट बाक्सर मनोज कुमार, पत्रकार राजीव खांडेकर, जलवायु विशेषज्ञ पंजाबराम डख को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप पाटिल ने जानकारी दी है।

read more: एफसीआई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करे, परिचालन लागत घटाए, ‘भ्रष्टाचार-मुक्त’ बने : गोयल

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े, निरंजन मंडल महाराष्ट्र के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश क्षीरसागर, करनाल सांसद संजय भाटिया, राज्यसभा सदस्य कृष्णलाल पंवार, सांसद श्रीकांत शिंदे, पानीपत और ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा, घरौंडा विधायक हरविन्दर कल्याण, विधायक पूंडरी रणधीर गोलन और जिला परिषद पानीपत की चेयरपर्सन ज्योति शर्मा भी पहुंचें। सशक्त भारत परिवार, समस्त धानक मराठा समाज, पानीपत गौरवगाथा स्मृति समिति, छत्रपति शिवाजी महाराज वेलफेयर संघ पानीपत, जयदीप फाउंडेशन ट्रस्ट, मराठा सेवा संघ हरियाणा, विश्व हिंदू परिषद पानीपत, सार्वजनिक मराठा गणेश मंडल, पानीपत का भी कार्यक्रम में सहयोग रहा।

सिंधिया राजवंश ने वापस लाया उज्जैन के गोपाल मंदिर का दरवाजा

इसके पहले 17 दिसंबर को एमपी के सीएम मोहन यादव ने कहा था कि मुगल शासकों द्वारा भारत पर आक्रमण कर यहाँ के मंदिरों को तोडऩे और यहाँ की संपत्ति को लूटपाट की गई थी। इसी प्रकार धार्मिक नगरी उज्जैन के गोपाल मंदिर पर लगा दरवाजा यहाँ के राजा महादजी सिंधिया मोहम्मद गजनवी से लेकर आए और इसे गोपाल मंदिर में लगवाया। यह दरवाजा आज भी लगा हुआ है। गोपाल मंदिर के प्रांगण में लगा दरवाजा भी एक इतिहास को दर्शाता है, क्योंकि जब मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर तोड़ा तो वहाँ का सारा माल लूटकर ले गया था, उस समय हम कमजोर थे लेकिन महादजी सिंधिया उज्जैन के राजा हुए तो वह तलवार के बल पर अफगानिस्तान के काबुल से सोमनाथ से लूटा गया चांदी का यह दरवाजा उज्जैन ले आए थे और उन्होंने इसे उज्जैन के गोपाल मंदिर पर लगा दिया था। अपना यह पुराना इतिहास हमें अहसास करवाता है।

read more: Digital Tourist App For Ayodhya : सीएम योगी आदित्यनाथ ने की डिजिटल टूरिस्ट ऐप की शुरुआत, ई वाहनों को दिखाई हरी झंडी

इतिहास के जानकार इस दरवाजे और मंदिर के बारे में बताते हैं कि सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट का प्रसिद्ध द्वारकाधीश गोपाल मंदिर धर्म और इतिहास की पुरातन धरोहर और वैभव को समेटे हुए है। मंदिर का मुख्य द्वार पन्ने से निर्मित है। यह अद्भुत, अति सुंदर द्वार (दरवाजा) सोमनाथ के मूल मंदिर का है। मोहम्मद गजनवी इसे लूटकर अपने साथ ले गया था। सिंधिया राजवंश ने इसे प्राप्त कर गोपाल मंदिर में लगाया। उज्जैन के हृदय स्थल छत्री चौक के सामने सन् 1909 में महाराजा दौलतराव सिंधिया की महारानी बायजाबाई सिंधिया ने गोपाल मंदिर का निर्माण करवाया था। मराठा शैली में निर्मित यह मंदिर आज भी सिंधिया राजवंश की गौरवगाथा कह रहा है। मंदिर का मुख्य द्वार चांदी का है। इसकी बनावट में तांबे का भी उपयोग हुआ है जिस पर सोने की पॉलिश की गई है। यह द्वार सोमनाथ के मूल मंदिर का है। सन् 1025 में महमूद गजनवी इसे लूटकर अपने साथ ले गया था। 1750 के आसपास इसे अहमद शाह अब्दाली ने लूट लिया था। इसके बाद यह द्वार मराठा शासक महादजी सिंधिया के पास आ गया।


लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com