Vande Bharat: सदन में शोर.. लोकतंत्र कमजोर? बिना किसी सार्थक चर्चा खत्म हुआ मानसून सत्र, आखिर कैसे निकलेगी समाधान की राह?

सदन में शोर.. लोकतंत्र कमजोर? बिना किसी सार्थक चर्चा खत्म हुआ मानसून सत्र, Monsoon session ends without any meaningful discussion

Vande Bharat: सदन में शोर.. लोकतंत्र कमजोर? बिना किसी सार्थक चर्चा खत्म हुआ मानसून सत्र, आखिर कैसे निकलेगी समाधान की राह?
Modified Date: August 13, 2026 / 11:58 pm IST
Published Date: August 13, 2026 11:53 pm IST

नई दिल्लीः Monsoon Session आखिरकार बिना किसी सार्थक चर्चा के संसद का मानसून सत्र खत्म हो गया। हंगामे से शुरू और हंगामे के साथ ही खत्म हुए इस सत्र को याद रखा जाएगा। विपक्ष के शोर-शराबे और विरोध के नित-नए तरीकों के लिए काम के लिहाज से देखें तो सत्तापक्ष ने कुछ अहम बिल पेश किए, पास भी कराए लेकिन क्या ये पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा के साथ नहीं हो सकता था?

Monsoon Session संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार दूर ना हो सकी। राज्यसभा की कार्यवाही एक घंटा और लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ एक मिनट चली। संसद परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले रखा। कांग्रेस सांसदों ने हाथों में टेडीबियर और मंकी टॉय लेकर पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की।

छत्तीसगढ़ बीजेपी के विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस नारे को पीएम मोदी का अपमान बताकर कांग्रेस को घेरा। संसद के मानसून सत्र में कुल 12 नए बिल पेश किए गए और 11 बिल पास हुए लेकिन किसी भी बिल पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकती। बीजेपी और कांग्रेस ने इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। संसद का मानसून सत्र भले खत्म हो गया हो, लेकिन अपने पीछे एक बड़ा सवाल छोड़ गया। क्या संसद सिर्फ बिल पास करने की जगह है या फिर उन बिलो पर खुलकर चर्चा करने का मंच। 12 बिल पेश हुए और 11 बिल पास भले हो गए हों, लेकिन इसके पहलुओं पर सार्थक बहस का मौका हाथ से निकल गया। संसद में आवाजे टकरा सकती हैं, मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अगर चर्चा ही नहीं होगी तो लोकतंत्र में समाधान की राह कैसे निकलेगी?

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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।