West Bengal First BJP CM Suvendu Adhikari / Image SourcE : x
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आज एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो चुकी है। शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। भाजपा के लिए यह समारोह केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि पार्टी इसे राज्य में एक दशक लंबे राजनीतिक विस्तार की परिणति के रूप में देख रही है। यह वही मैदान है जो कभी वामदलों के शक्ति प्रदर्शन का गढ़ था और बाद में भाजपा विरोधी आंदोलनों का केंद्र बना, लेकिन आज यहाँ पहली बार भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण संपन्न हुआ।
शुभेंदु अधिकारी के लिए यह दिन उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में की थी, जिसके बाद वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक थे । साल 2020 में मतभेदों के चलते वह तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए, जहाँ गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उन्हें पार्टी में शामिल कराया था। तब से लेकर आज तक, वे बंगाल में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं।
शुभेंदु अधिकारी को बंगाल की राजनीति का ‘जायंट किलर’ माना जाता है। उन्होंने लगातार दो बार मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनावी मैदान में मात दी है। पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की और अब 2026 के चुनावों में भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर भी उन्हें शिकस्त दी थी।
शुभेंदु अधिकारी पिछले पांच दशकों में बंगाल के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो कोलकाता के बड़े राजनीतिक घरानों से नहीं, बल्कि एक छोटे जिले मेदिनीपुर से निकलकर इस ऊंचे पद तक पहुंचे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनसे पहले ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखने वाले आखिरी मुख्यमंत्री अजय मुखर्जी थे, जिन्होंने 1970 में कमान संभाली थी। यह एक बड़ा संयोग है कि अजय मुखर्जी भी उसी मेदिनीपुर क्षेत्र से थे, जहाँ से शुभेंदु अधिकारी आते हैं। इस तरह 56 साल बाद एक बार फिर बंगाल की सत्ता की चाबी मेदिनीपुर के हाथ में आई है।
शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के 9वें और भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेताओं का मंच पर अभिनंदन किया। इस राजतिलक के साथ ही बंगाल की सत्ता की कमान अब पूरी तरह से भाजपा के हाथों में आ गई है, जिससे राज्य की राजनीति को एक नया स्वरूप मिलने की उम्मीद है।