छत्तीसगढ़ के कांकेर में ‘सेरेब्रल मलेरिया’ से दो बच्चों की मौत, पांच अस्पताल में भर्ती
छत्तीसगढ़ के कांकेर में ‘सेरेब्रल मलेरिया’ से दो बच्चों की मौत, पांच अस्पताल में भर्ती
कांकेर, 27 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मानसून के दौरान सेरेब्रल (मस्तिष्क) मलेरिया से दो बच्चों की मौत हो गई है, जबकि पांच का एक सरकारी अस्पताल में उपचार चल रहा है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि कांकेर जिले के सरांडी गांव स्थित आदिवासी आवासीय विद्यालय के उस बच्चे की भी हाल में मौत हो गयी, जिसे पहले मलेरिया होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मृत्यु से पहले वह मलेरिया से पूरी तरह ठीक हो चुका था।
उन्होंने बताया कि मलेरिया से मौत के आरोपों के कारण शव का पोस्टमार्टम कराया गया। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण मलेरिया नहीं बताया गया है। हालांकि, विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आर.सी. ठाकुर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जिले के गांवों के साथ-साथ आदिवासी आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में मलेरिया जांच अभियान तेज कर दिया है। जांच अभियान के दौरान 24 जुलाई से मलेरिया के संक्रमित मामले सामने आने शुरू हुए हैं।
‘सेरेब्रल’ मलेरिया 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' परजीवी के संक्रमण से होने वाली जानलेवा जटिलता है, जो मस्तिष्क को प्रभावित करती है। इसके कारण रोगी कोमा में जा सकता है और मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।
ठाकुर ने बताया कि आठ-वर्षीय करीना विश्वकर्मा और नौ-वर्षीय सुभाष कुमेटी की क्रमशः 25 और 26 जुलाई को कांकेर शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
अधिकारी ने बताया कि जिले के विभिन्न हिस्सों के पांच बच्चे वर्तमान में मलेरिया से संक्रमित हैं और उनका शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार चल रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की जांच में मलेरिया की पुष्टि हो रही है, लेकिन उनमें हल्के लक्षण हैं, उनका इलाज घर पर किया जा रहा है। वहीं, गंभीर लक्षण वाले बच्चों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा, 'हमारे पास जांच किट और दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अन्य विभागों के साथ समन्वय कर प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जांच और उपचार अभियान सक्रिय रूप से चला रही हैं।'
आदिवासी कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सुभाष कुमेटी मरदापोट्टी गांव स्थित बालक आदिवासी आवासीय आश्रम (छात्रावास) का छात्र था।
अधिकारी ने बताया कि 22 जुलाई को आश्रम में मलेरिया जांच शिविर लगाया गया था, जिसमें तीन से चार छात्र मलेरिया संक्रमित पाए गए। इसके बाद उन्हें उपचार उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने बताया कि उस समय सुभाष कुमेटी की मलेरिया संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, 24 जुलाई को उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद दोबारा जांच में उसके मलेरिया से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उसके माता-पिता को सूचना दी गई, जो उसे उपचार के लिए छात्रावास से अपने साथ ले गए। बाद में उसे कांकेर शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
अधिकारी ने बताया कि अब स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से जिले के सभी आदिवासी छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में मलेरिया जांच अभियान चलाया जा रहा है।
भाषा तान्या सुरेश
सुरेश
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