CG Retired Professors Protest: रिटायर्ड प्रोफेसरों ने खोला मोर्चा, सड़कों पर उतरे 400 से ज्यादा लोग, जानिए किस बात को लेकर जताई नाराजगी

CG Retired Professors Protest: रिटायर्ड प्रोफेसरों ने खोला मोर्चा, सड़कों पर उतरे 400 से ज्यादा लोग, जानिए किस बात को लेकर जताई नाराजगी

CG Retired Professors Protest: रिटायर्ड प्रोफेसरों ने खोला मोर्चा, सड़कों पर उतरे 400 से ज्यादा लोग, जानिए किस बात को लेकर जताई नाराजगी

CG Retired Professors Protest | Photo Credit: IBC24

Modified Date: September 30, 2026 / 01:12 pm IST
Published Date: September 30, 2026 1:12 pm IST
HIGHLIGHTS
  • रिटायर्ड प्राध्यापक और कर्मचारी धरने पर बैठे
  • पेंशन बंद किए जाने के विरोध में
  • पूर्व छात्रों ने भी धरना स्थल पहुंचकर शिक्षकों का समर्थन किया

भिलाई: CG Retired Professors Protest प्रदेशभर के अनुदान प्राप्त कॉलेज के 4 सौ से ज्यादा रिटायर्ड प्रोफेसर और कर्मचारी एक दिवसीय धरने पर बैठे हैं। भिलाई प्रोफेसर उस कल्याण कॉलेज के सामने धरने पर बैठे हैं जहां से वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपनी पढ़ाई की। (Retired Professor Pension) इन प्रोफेसर्स का कहना है कि बरसों पहले जब सरकारी कॉलेज कम होते थे, तब इन्ही अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्राध्यापकों ने अपनी मेहनत औऱ् लगन से छात्रों को बढ़ाया और वे छात्र ऊंचे मुकाम तक पहुंचे और आज वही छात्र उन्हें गुरुदक्षिणा देने की बजाए उनके लिए डेथ वारेंट निकाल रहे हैं। (Bhilai Professors Protest)

रिटायर्ड प्रोफेसर-कर्मचारियों का धरना

CG Retired Professors Protest प्राध्यापकों का कहना है कि उन्होंने मांग रखी थी कि जो प्राध्यापक जिस वेतनमान में रिटायर्ड हो रहा है, उसे उसी वेतनमान के आधार पर पेंशन दिया जाए। उस मांग को केबिनेट ने खारिज कर दिया, लेकिन 1 सितंबर को काला आदेश जारी कर उनका पूरा पेंशन ही बंद कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने इस निर्णय को लोकहित में लिया है। उन्होंने कहा कि केवल 4 सौ लोगों के पेंशन बंद करने से कितना लोकहित होगा, यह किसी से छिपा नहीं है।

पूर्व छात्र ने भी किया समर्थन

एक ओर सरकार प्रदेशभर में कई मुफ्त की योजनाएं चला रही है, महतारी वंदन में अरबो रुपए बांट रही है, ऐसे में हर महीने 14 करोड़ रुपए पेंशन के भारी पड़ रहे हैं। इनका कहना है कि वे बुजुर्ग हो चुके हैं और उम्र के उस पड़ाव पर है जहां उनकी पेंशन से वे अपनी दवा और जरूरत के खर्च के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़ता, लेकिन पेंशन के बंद होने के बाद उनके आगे जीवन यापन के लिए हाथ फैलाने के अलावा दूसरा चारा ही नहीं बचता। इधऱ् प्रोफेसर्स का साथ देने उनके पढ़ाए पूर्व छात्र भी धरना स्थल पर पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन किया।

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