मौली धागा पहनते हैं तो जाने क्या हैं इसके नियम और तौर-तरीके
Mauli Dhaaga: ऐसा माना जाता है कि कलाई पर इस धागें को बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा होती है, तो जानिए इसके नियम और तौर-तरीके
Mauli Dhaaga
Mauli Dhaaga: हिंदू धर्म में कलावे या मौली का बहुत महत्व होता है। लोग इसे रक्षा सूत्र की तरह पहनते हैं। ऐसे में कलावे को किसी भी वक्त खोलना अशुभ माना जाता है। कोई भी धार्मिक कार्य हो या फिर कोई शुभ अवसर कलावा बांधना शुभ होता है।
जाने कलावें का महत्व
ऐसा माना जाता है कि कलाई पर इस धागें को बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हाथ में कलावा बांधने से तीनों महादेवियों महालक्ष्मी, सरस्वती और काली की कृपा बनी होती है, और व्यक्ति को उसके ऊपर आने वाले हर संकटों से छुटकारा मिलता है। इसलिए कलावा या मौली को बंधवाते और उतारे समय कुछ नियम होते हैं, जिनके अनुसार ही कलावा बांधना और बदलना चाहिए।
यह जानना बहुत जरूरी है कि कलावा कितने प्रकार के होते हैं, तो आपको बता दें कि कलावा दो प्रकार के होते हैं। एक तीन धागों वाला और दूसरा 5 धागों वाला। तीन धागे वाले कलावे की बात करें तो ये तीन रंग लाल, पीला और हरे रंग में होता है। इसको तीन शक्तियों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक के तौर पर हाथों में बांधा जाता है। वहीं अगर पांच धागों वाले कलावे की बात करें तो यह लाल, पीला, हरा सफेद और नीले रंग का होता है। यह पंचदेवों का प्रतीक होता है।
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कलावा बांधने का नियम
कलावा बांधने के भी नियम होते है। यदि महिला अविवाहित है तो उसे हमेशा सीधे यानी दाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है। तो वहीं अगर वह विवाहित है तो उसे बाएं यानी उल्टे हाथ में कलावा बांधा जाता है। पुरुषों के साथ इसका ठीक उल्टा होता है। उनको दाएं हाथ पर कलावा बंधा जाता है।
कलावा को केवल तीन बार ही लपेटना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी पुराने कलावे को फेंके नहीं बल्कि इसे किसी पीपल के पेड़ के नीचे डाल देना चाहिए। केवल मंगलवार और शनिवार को ही अपने हाथों से कलावे को उतारें। जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए।
वैज्ञानिक दृष्टि से कलावा बांधना स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण कलाई पर होता है। कलाई में मौली बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। साथ ही अगर कोई बीमारी है तो वह भी नहीं बढ़ती है। साथ ही कलावा बांधने से त्रिदोष-वात, पित्त और कफ का शरीर में सामंजस्य बना रहता है। सिर्फ इतना ही नहीं ब्ल्ड प्रेशर, हार्ट अटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए भी कलावा या मौली बांधना काफी अच्छा होता है।
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