हाथरस दुष्कर्म मामला : पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर सरकार के रवैये पर अदालत नाराज
हाथरस दुष्कर्म मामला : पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर सरकार के रवैये पर अदालत नाराज
लखनऊ, 25 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने हाथरस दुष्कर्म मामले की पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
अदालत ने राज्य सरकार के 22 फरवरी, 2025 के फैसले को रद्द करते हुए उसे तीन महीने के भीतर पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पहले राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने इस अनुरोध पर समुचित ध्यान नहीं दिया।
पीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अपने फैसले में परिवार को पुनर्वास के लिए कासगंज, एटा और अलीगढ़ में से किसी एक स्थान को चुनने का विकल्प दिया था।
सोमवार को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि 22 फरवरी, 2025 के फैसले में सरकार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास के परिवार के अनुरोध का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसलिए इसे उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता।
पीठ ने कहा कि इस मामले में राज्य की ओर से अनावश्यक विरोध दिखाई देता है और उसके रवैये से परिवार के इस आरोप को बल मिलता है कि सरकार इस मामले को अपने खिलाफ मुकदमे की तरह देख रही है।
पीड़िता के परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कहा कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ हाथरस के करीब हैं, जिससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में परिवार का कोई रिश्तेदार भी नहीं रहता है।
उन्होंने कहा कि इसके विपरीत परिवार के रिश्तेदार गाजियाबाद और नोएडा में रहते हैं, जहां बसने पर वे बिना किसी भय के सामान्य जीवन जी सकेंगे।
अदालत ने निर्देश दिया कि पुनर्वास पूरा होने के बाद परिवार के एक सदस्य को रोजगार भी दिया जाए, जैसा कि 26 जुलाई, 2022 के आदेश में निर्देश दिया गया था।
पीठ ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में उन्हें 30 नवंबर, 2026 को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होना होगा।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर, 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना सामने आई थी। घटना के करीब दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में युवती की मौत हो गई थी।
मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने चार आरोपियों पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना रात में पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया था। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को गलत बताया था।
भाषा
सं,सलीम रवि कांत
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LUCKNOW
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