Reported By: Hiten Chauhan
,Balaghat Missing Son Returns Home /Image: IBC24 File
Balaghat Missing Son Returns Home: बालाघाट जिले के खैरलांजी थाना क्षेत्र के खुर्सीपार गांव में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। 15 साल पहले घर से लापता हुआ बेटा, जिसे परिवार ने लगभग खो दिया था, अब वापस अपने घर लौट आया है। तमिलनाडु से आई एक चिट्ठी ने 15 साल पुरानी उम्मीद को फिर से जिंदा किया और बालाघाट पुलिस की पहल ने मां-बाप के आंगन की खुशियां लौटा दीं।
Balaghat Missing Son Returns Home साल 2010 खुर्सीपार गांव का रहने वाला आशीष साखरे अचानक घर से लापता हो गया। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे आशीष की तलाश में परिवार ने हर संभव कोशिश की। रिश्तेदारों से लेकर पुलिस तक, हर जगह तलाश हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। वक्त बीतता गया, साल दर साल गुजरते गए। पिता की आंखें बेटे के इंतजार में थक गईं और मां की रातें आंसुओं में कटती रहीं। परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन मां के दिल में बेटे की वापसी की आस अब भी जिंदा थी। फिर एक दिन, 3 जून को खुर्सीपार के पते पर एक चिट्ठी पहुंची। यह कोई साधारण खत नहीं था, बल्कि 15 साल बाद बेटे के जिंदा होने की खबर लेकर आया था।
Balaghat Missing Son Returns Home दरअसल, घर से निकलने के बाद आशीष भटकते-भटकते करीब 1500 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के थालावड़ी पहुंच गया था। वहां एक संस्था में उसका इलाज और देखभाल होती रही। करीब 12 साल तक वह वहीं रहा। दो साल पहले उसकी याददाश्त लौटनी शुरू हुई और उसे अपनी नानी और गांव की याद आने लगी। उसने घर लौटने की इच्छा जताई, जिसके बाद एक व्यक्ति ने उसके बताए पते पर चिट्ठी भेज दी। जब परिवार को बेटे के बारे में पता चला, तो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे लाना आसान नहीं था। ऐसे में बालाघाट पुलिस की हमदर्द सेल मदद के लिए आगे आई।
एएसआई शैलेंद्र शुक्ला और पुलिस टीम आशीष के भाई-बहन को लेकर तमिलनाडु पहुंची और उसे सुरक्षित घर वापस लेकर आई। आज मां गीता साखरे की आंखों में आंसू जरूर हैं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। 15 साल बाद बेटे की घर वापसी ने पूरे परिवार के जीवन में फिर से खुशियां लौटा दी हैं।
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