Balaghat Missing Son Returns Home: पहले कभी नहीं पढ़ी होगी ऐसी स्टोरी! 15 साल बाद… 1500 किलोमीटर दूर से आई चिट्ठी ने कैसे मिलाया बिछड़ा परिवार…. रुला देगी यह कहानी

Balaghat Missing Son Returns Home: बालाघाट जिले के खैरलांजी थाना क्षेत्र के खुर्सीपार गांव में 15 साल पहले घर से लापता हुआ बेटा वापस लौट आया।

Balaghat Missing Son Returns Home: पहले कभी नहीं पढ़ी होगी ऐसी स्टोरी! 15 साल बाद… 1500 किलोमीटर दूर से आई चिट्ठी ने कैसे मिलाया बिछड़ा परिवार…. रुला देगी यह कहानी

Balaghat Missing Son Returns Home /Image: IBC24 File

Modified Date: June 16, 2026 / 02:12 pm IST
Published Date: June 16, 2026 2:00 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 15 साल पहले लापता हुआ आशीष साखरे तमिलनाडु में मिला।
  • एक चिट्ठी ने परिवार को बेटे के जिंदा होने की जानकारी दी।
  • बालाघाट पुलिस की मदद से आशीष सुरक्षित अपने घर लौट आया।

Balaghat Missing Son Returns Home: बालाघाट जिले के खैरलांजी थाना क्षेत्र के खुर्सीपार गांव में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। 15 साल पहले घर से लापता हुआ बेटा, जिसे परिवार ने लगभग खो दिया था, अब वापस अपने घर लौट आया है। तमिलनाडु से आई एक चिट्ठी ने 15 साल पुरानी उम्मीद को फिर से जिंदा किया और बालाघाट पुलिस की पहल ने मां-बाप के आंगन की खुशियां लौटा दीं।

 

कोई साधारण खत नहीं था

Balaghat Missing Son Returns Home साल 2010 खुर्सीपार गांव का रहने वाला आशीष साखरे अचानक घर से लापता हो गया। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे आशीष की तलाश में परिवार ने हर संभव कोशिश की। रिश्तेदारों से लेकर पुलिस तक, हर जगह तलाश हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। वक्त बीतता गया, साल दर साल गुजरते गए। पिता की आंखें बेटे के इंतजार में थक गईं और मां की रातें आंसुओं में कटती रहीं। परिवार ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन मां के दिल में बेटे की वापसी की आस अब भी जिंदा थी। फिर एक दिन, 3 जून को खुर्सीपार के पते पर एक चिट्ठी पहुंची। यह कोई साधारण खत नहीं था, बल्कि 15 साल बाद बेटे के जिंदा होने की खबर लेकर आया था।

भटकते-भटकते पहुंच गया था तमिलनाडु

Balaghat Missing Son Returns Home दरअसल, घर से निकलने के बाद आशीष भटकते-भटकते करीब 1500 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के थालावड़ी पहुंच गया था। वहां एक संस्था में उसका इलाज और देखभाल होती रही। करीब 12 साल तक वह वहीं रहा। दो साल पहले उसकी याददाश्त लौटनी शुरू हुई और उसे अपनी नानी और गांव की याद आने लगी। उसने घर लौटने की इच्छा जताई, जिसके बाद एक व्यक्ति ने उसके बताए पते पर चिट्ठी भेज दी। जब परिवार को बेटे के बारे में पता चला, तो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे लाना आसान नहीं था। ऐसे में बालाघाट पुलिस की हमदर्द सेल मदद के लिए आगे आई।

 

एएसआई शैलेंद्र शुक्ला और पुलिस टीम आशीष के भाई-बहन को लेकर तमिलनाडु पहुंची और उसे सुरक्षित घर वापस लेकर आई। आज मां गीता साखरे की आंखों में आंसू जरूर हैं, लेकिन ये आंसू खुशी के हैं। 15 साल बाद बेटे की घर वापसी ने पूरे परिवार के जीवन में फिर से खुशियां लौटा दी हैं।

 

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.