भोजशाला विवाद: एएसआई ने कहा, ‘विवादित संरचना पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों से बनाई गई थी’
भोजशाला विवाद: एएसआई ने कहा, 'विवादित संरचना पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों से बनाई गई थी'
इंदौर, पांच मई (भाषा) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में मंगलवार को कहा कि इस विवादित स्थल पर धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद संरचना मंदिरों के अवशेषों से बनाई गई थी।
एएसआई ने यह दावा 98 दिन के अपने वैज्ञानिक सर्वेक्षण और 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर किया।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।
इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के समक्ष सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने इस परिसर में दो साल पहले किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण का विस्तृत ब्योरा पेश किया।
उन्होंने एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की सर्वेक्षण रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘प्राप्त स्थापत्य अवशेषों, मूर्तिकला के टुकड़ों, साहित्यिक ग्रंथों वाले शिलालेखों की बड़ी शिलाओं, स्तंभों पर उत्कीर्ण नागकर्णिका शिलालेख आदि से संकेत मिलता है कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित एक विशाल संरचना विद्यमान थी। वैज्ञानिक जांच और जांच के दौरान प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर पहले से मौजूद इस संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।’’
जैन ने रिपोर्ट के हवाले से यह भी कहा कि वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और पुरातात्विक उत्खनन, प्राप्त वस्तुओं के अध्ययन और विश्लेषण, स्थापत्य अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों के अध्ययन, कला और मूर्तिकला के आधार पर कहा जा सकता है कि विवादित संरचना पहले से मौजूद मंदिरों के अवशेषों से बनाई गई थी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने रिपोर्ट का सार पेश करते हुए इस ओर भी अदालत का ध्यान खींचा कि विवादित परिसर के स्तंभों और शहतीरों जैसे कई वास्तुशिल्पीय घटक मूल रूप से मंदिरों की संरचनाओं का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद बनाने के लिए उपयोग में लाया गया था।
उन्होंने दलील दी कि विवादित स्थल की मूल संरचना में हुए परिवर्तन के प्रमाणों में संस्कृत और प्राकृत के क्षतिग्रस्त या छिपे हुए शिलालेखों के साथ ही हिंदू देवी-देवताओं और जानवरों की मूर्तियां शामिल हैं जिन्हें खंडित कर दिया गया था।
एएसआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विवादित स्थल पर संस्कृत और प्राकृत के सभी शिलालेख, अरबी और फारसी के शिलालेखों से पहले के हैं, जो दर्शाता है कि संस्कृत और प्राकृत के शिलालेखों का उपयोग करने वाले या इन्हें उत्कीर्ण करने वाले इस स्थान पर पहले से मौजूद थे।
खंडपीठ ने भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष की व्यक्त आपत्तियों के मद्देनजर जानना चाहा कि गुजरे बरसों में दायर मुकदमों में विवादित परिसर की स्थिति को लेकर एएसआई के जवाबों में कुछ अंतर क्यों हैं?
इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जैन ने दलील दी कि परिसर के पुराने अध्ययनों में केवल अधिकारी शामिल थे, जबकि मौजूदा सर्वेक्षण में वैज्ञानिकों की मदद से ‘ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर)’ जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी किया गया है।
मामले में बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।
भाषा हर्ष आशीष
आशीष

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