धार रियासत के दरबार ने 1935 में भोजशाला को मस्जिद घोषित किया था : मुस्लिम पक्ष
धार रियासत के दरबार ने 1935 में भोजशाला को मस्जिद घोषित किया था : मुस्लिम पक्ष
इंदौर, 28 अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में मुस्लिम पक्ष ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद के मामले में मंगलवार को दावा किया कि 1935 में तत्कालीन धार रियासत के दरबार ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद घोषित किया था।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व संरक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने मुनीर अहमद और मुस्लिम समुदाय के अन्य लोगों के हस्तक्षेप आवेदन और एक रिट अपील के पक्ष में इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी के सामने विस्तृत दलीलें पेश कीं।
उन्होंने भोजशाला मामले में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संगठन और कुलदीप तिवारी व एक अन्य व्यक्ति की दायर दो जनहित याचिकाओं पर सवाल उठाए। इन याचिकाओं में कहा गया है कि भोजशाला दरअसल सरस्वती मंदिर है और इस परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिया जाना चाहिए।
मेनन ने दोनों याचिकाओं की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भोजशाला विवाद को व्यापक जनहित का स्वरूप देना विधिसंगत नहीं है क्योंकि यह मूलतः एक विशिष्ट धार्मिक समुदाय से संबंधित प्रश्न है।
उन्होंने तत्कालीन धार रियासत के 24 अगस्त 1935 को जारी ‘ऐलान’ (सरकारी आदेश) को विधिसम्मत अधिसूचना या गजट के रूप में प्रस्तुत करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया कि इस ‘ऐलान’ में भोजशाला के विवादित परिसर को मस्जिद घोषित किया गया था और वहां भविष्य में भी नमाज पढ़ना जारी रखे जाने की बात कही गई थी।
मेनन ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि भोजशाला विवाद का परीक्षण धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि विधि के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने भोजशाला की धार्मिक प्रकृति को लेकर अदालत में गुजरे बरसों में दायर मुकदमों में राज्य सरकार और एएसआई के अलग-अलग समय पर अलग-अलग राय जताए जाने का हवाला देते हुए विरोधाभासों की ओर इशारा किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस तरह का बदलता रुख कानून की दृष्टि में असंगत, मनमाना और न्यायिक परीक्षण में अस्वीकार्य है क्योंकि सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह एक सुसंगत और स्थिर दृष्टिकोण अपनाए।
भोजशाला मामले में अदालत की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। उच्च न्यायालय इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।
भाषा हर्ष शोभना
शोभना

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