भाजपा ने महिला आरक्षण व परिसीमन साथ लाकर संवैधानिक ढांचे को बदलने का ‘कुत्सित’ प्रयास किया:कांग्रेस

भाजपा ने महिला आरक्षण व परिसीमन साथ लाकर संवैधानिक ढांचे को बदलने का ‘कुत्सित’ प्रयास किया:कांग्रेस

भाजपा ने महिला आरक्षण व परिसीमन साथ लाकर संवैधानिक ढांचे को बदलने का ‘कुत्सित’ प्रयास किया:कांग्रेस
Modified Date: April 20, 2026 / 07:13 pm IST
Published Date: April 20, 2026 7:13 pm IST

भोपाल, 20 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन को साथ मिलाकर संविधान के ढांचे को बदलने एवं सारी कार्यकारी शक्तियां अपने हाथ में लेने का ‘कुत्सित’ प्रयास किया, जो सीधे तौर पर संविधान की मूल भावना पर हमला था।

पार्टी ने लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संशोधन विधेयक) के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा बताया एवं कहा कि कांग्रेस इस जीत का स्वागत करती है।

कांग्रेस की महिला इकाई की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने यहां पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, ‘‘केंद्र की मोदी सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के माध्यम से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश रची थी, विपक्षी एकजुटता ने उसे विफल कर दिया।’’

उन्होंने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर मतविभाजन ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा, इसलिए, यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो पाया।

ओझा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट कर देना चाहती है कि समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में शतप्रतिशत एकजुट है और सभी ने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन किया था और आज भी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक़ तुरंत मिलना चाहिए।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।

सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े।

लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।

सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।

ओझा ने कहा, ‘‘अपनी कार्यकारी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए मोदी सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन को एक साथ मिलाकर संविधान के ढांचे को बदलने एवं सारी कार्यकारी शक्तियां अपने हाथ में लेने का जो निंदनीय और कुत्सित प्रयास किया गया है, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर किया गया हमला था।’’

उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है तो वह जनगणना और परिसीमन का इंतजार क्यों कर रही है?

उन्होंने कहा, ‘‘आरक्षण को मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के दायरे में आज से ही लागू किया जा सकता है।’’

कांग्रेस नेता ने महिला सशक्तीकरण को कांग्रेस की विचारधारा का मूल हिस्सा बताया और याद दिलाया कि 1989 में ही तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा, इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया।

उन्होंने कहा, ‘‘आज देश भर में जो लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं, वह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मूल विचारधारा महिलाओं और उनके सशक्तीकरण के खिलाफ रही है।

इससे पहले, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के लिए कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की ‘महिला विरोधी मानसिकता’ को दोषी करार दिया और कहा कि आने वाले चुनावों में इन दलों को उनके कर्मों की कीमत चुकानी होगी।

भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार

राजकुमार


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