भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण एवं समस्याओं के निराकरण के लिये प्रतिबद्ध है। किसानों की उपज का भुगतान आसान बनाने के लिये प्रदेश में ई-अनुज्ञा प्रणाली लागू की गई है। कृषकों को इस प्रणाली से जोड़कर प्रत्येक भुगतान की एंट्री ई-अनुज्ञा पोर्टल पर हो रही है। व्यापारियों द्वारा इस प्रणाली का इस्तेमाल कर क्रय की गई कृषि उपज के परिवहन के लिये गेट पास बनाये जा रहे हैं। रिकॉर्ड संधारण में इस प्रणाली से बहुत लाभ हुआ है।
ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप है। मंडियों में इस योजना के लागू होने से मैनुअली संधारित रिकॉर्ड धीर-धीरे समाप्त हो रहा है। ई-मंडी योजना मंडी प्रांगण के अंदर कृषकों को प्रवेश से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिकली कैप्चर करने की प्रक्रिया है। योजना को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट वर्ष 2023 प्रदान किया गया है।
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ई-अनुज्ञा प्रणाली एक ऑनलाइन पोर्टल है, जिसके माध्यम से किसानों की उपज का भुगतान आसान और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक भुगतान की एंट्री ऑनलाइन की जाती है और व्यापारियों द्वारा कृषि उपज के परिवहन के लिए गेट पास बनाए जाते हैं।
ई-मंडी योजना क्या है?
ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित रूप है, जो मंडी में किसान से लेकर नीलामी, तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक रूप से कैप्चर करती है, जिससे मैनुअल रिकॉर्ड संधारण समाप्त हो रहा है।
ई-मंडी योजना को किसे पुरस्कार मिला है?
ई-मंडी योजना को स्कॉच आर्डर ऑफ मेरिट वर्ष 2023 प्रदान किया गया है।
ई-अनुज्ञा प्रणाली से किसानों को क्या लाभ हुआ है?
ई-अनुज्ञा प्रणाली से किसानों को अपनी उपज का भुगतान तेजी से और सही तरीके से मिल रहा है, साथ ही व्यापारियों को कृषि उपज के परिवहन के लिए गेट पास बनाने में सुविधा मिल रही है।
क्या ई-मंडी योजना सिर्फ मध्यप्रदेश में लागू है?
ई-मंडी योजना मध्यप्रदेश में लागू है, लेकिन इसकी सफलता के बाद अन्य राज्यों में भी इसे लागू करने पर विचार हो सकता है।