समान नागरिक संहिता के नाम पर मध्यप्रदेश में आदिवासी अस्मिता से समझौता स्वीकार नहीं : कांग्रेस
समान नागरिक संहिता के नाम पर मध्यप्रदेश में आदिवासी अस्मिता से समझौता स्वीकार नहीं : कांग्रेस
भोपाल, 11 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून लागू करने की तैयारियों पर शनिवार को चिंता जताते हुए कहा कि यह आदिवासी समाज की पहचान, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं के साथ सदियों से जीवन यापन कर रहा है।
उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, ‘ऐसे में एकरूपता वाला कानून थोपना न केवल उनकी परंपराओं का अनादर है, बल्कि यह उनके अधिकारों का भी उल्लंघन है।’
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा था कि यूसीसी का अध्ययन करें, इसे राज्य में लागू करना है।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद राज्य के गृह विभाग ने यूसीसी को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी, क्योंकि यूसीसी बिल तैयार करने की जिम्मेदारी इसी विभाग की है।
सूत्रों के अनुसार, जल्द ही राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-44 में यूसीसी को ‘राज्य के नीति निदेशक तत्व’ में रखा गया था, क्योंकि संविधान सभा यह समझती थी कि विविधताओं वाले देश में इस विषय पर व्यापक सहमति बनानी होगी।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘यह कोई तत्काल लागू होने वाला अनिवार्य अधिकार नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक सिद्धांत था। लेकिन, भाजपा सरकार इसे जल्दबाजी, बिना संवाद और बिना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के थोपने का प्रयास रही है।’
सिंघार ने कहा कि यूसीसी के नाम पर जो एकरूपता थोपी जा रही है, वह ‘विविधता में एकता’ के देश के मूल मंत्र को तोड़ती है।
उन्होंने कहा, ‘आदिवासी समाज की अपनी सामाजिक व्यवस्था, विवाह, उत्तराधिकार और भूमि से जुड़े रीति-रिवाज सदियों पुराने हैं। पांचवीं और छठी अनुसूची उन्हें सांस्कृतिक स्वायत्तता देती है। यदि यूसीसी बिना छूट के लागू हुई, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ होगा।’
सिंघार ने सरकार के ‘समानता’ के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि समानता का अर्थ एकरूपता नहीं होता, बल्कि हर समुदाय की विशिष्टता को सम्मान देते हुए न्याय सुनिश्चित करना होता है।
उन्होंने चिंता जताई कि न तो आदिवासी संगठनों, न पंचायतों, न ही किसी धार्मिक या सामाजिक समूह से चर्चा की गई।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘भाजपा का यही ‘नया सामान्य’ बन गया है – बिना विचार-विमर्श के कानून बनाना। यह अलोकतांत्रिक, सांप्रदायिक और असंवैधानिक है। सरकार को साफ जवाब देना चाहिए कि क्या यूसीसी आदिवासियों पर लागू होगा? यदि नहीं, तो संरक्षण की गारंटी क्यों नहीं दी जा रही? यह अनिश्चितता जानबूझकर फैलाया गया भय है।’
सिंघार ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि क्या आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे में लाया जाएगा या उन्हें इससे बाहर रखा जाएगा?
उन्होंने साथ ही मांग की कि आदिवासी समाज को इस संहिता से बाहर रखा जाए और उनकी परंपराओं व अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सिंघार ने कहा कि बिना सहमति और संवाद के लाया गया कानून समाज में बंटवारे का काम करेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘यूसीसी की घोषणा ने एकता की बजाय अलगाव पैदा किया है। सरकार तुष्टीकरण की राजनीति छोड़े, आदिवासी समाज को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए और सभी समुदायों को विश्वास में लेते हुए कोई साझा मसौदा तैयार किया जाए। जल्दबाजी और अलोकतांत्रिक तरीका भाजपा की असहिष्णु सोच को दर्शाता है।’
उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मुद्दे पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा हो, सभी धर्मों, जनजातियों और अल्पसंख्यकों को साथ लेकर ही कोई नीति बने, अन्यथा यह देश की सांस्कृतिक विविधता के लिए घातक साबित होगी।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत

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