पार्टी के भीतर टैलेंट हंट करने वाली कांग्रेस अपने एक विभाग के लिए नहीं खोज पा रही टैलेंट
टैलेंट हंट करने वाली कांग्रेस अपने एक विभाग के लिए नहीं खोज पा रही टैलेंट! Congress Party unable to find talent for Adivasi Morcha
नवीन कुमार सिंह, भोपाल: Congress Party unable to find talent लोकसभा चुनावों से अब तक एआईसीसी को ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष के लिए चेहरा नहीं तलाश सकी है। मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ झारखंड जैसे राज्यों में तमाम आदिवासी नेताओं की सक्रियता के बाद भी आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। अब कांग्रेस ये दावा कर रही है कि जल्द ही आलाकमान की खोज पूरी होने वाली है।
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Congress Party unable to find talent आदिवासियों के मामले में बीजेपी सरकार की चूले हिलाने वाली कांग्रेस के पास अपने ही विभाग का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं है। दरअसल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी साढ़े तीन साल से आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश कर रही है। ऐसा तब से हो रहा है जब से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों में कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा ट्राइबल सीटें जीती हैं। मध्यप्रदेश में भी साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने सर्वाधिक ट्राइबल सीटें जीतक सरकार बनाई थी। राजस्थान,छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस बहुमत में रही। झारखंड जैसे देश के सबसे बड़े जनजातीय राज्य में कांग्रेस ने झामुमो के साथ सरकार बनाई है। बावजूद इसके कांग्रेस को आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष के लिए अब तक कोई चेहरा नसीब नहीं हो सका है।
दरसअल ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे वी किशोर चंद्र देव ने लोकसभा चुनाव के पहले ही पार्टी छोड़ दी थी, तब से आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष का पद खाली हैं। हालांकि मध्यप्रदेश से कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार और छत्तीसगढ़ से कांग्रेस विधायक मनोज मंडावी ऑल इंडिया कांग्रेस में उपाध्यक्ष के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के आदिवासी नेता बड़े चेहरे के इंतजार में है। ताकि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में आदिवासी मामलों को लेकर दमदारी से बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाए। उधर बीजेपी सरकार के मंत्री भारत सिंह कुशवाहा कहते हैं कि कांग्रेस अक्सर गुटबाजी की वजह से लीडर नहीं तलाश पाती।
9 फीसदी हिस्सा रखने वाले जनजातीय समाज की लोकसभा में 41 सीटें तो देशभर की विधानसभाओं में 527 सीटें हैं। आदिवासी आरिक्षत विधानसभा सीटों में कांग्रेस बीजेपी से कोसो आगे है, बावजूद कांग्रेस के पास खुद का कोई बड़ा आदिवासी चेहरा नहीं है। आलाकमान की बेरुखी की वजह से पार्टी से जुड़े जनजातीय समाज के कार्यकर्ताओं में भी नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

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