इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ गाने से कांग्रेस की महिला पार्षद के इनकार पर विवाद

इंदौर में 'वंदे मातरम्’ गाने से कांग्रेस की महिला पार्षद के इनकार पर विवाद

इंदौर में ‘वंदे मातरम्’ गाने से कांग्रेस की महिला पार्षद के इनकार पर विवाद
Modified Date: April 8, 2026 / 11:06 pm IST
Published Date: April 8, 2026 11:06 pm IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), आठ अप्रैल (भाषा) इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान बुधवार को कांग्रेस की एक महिला पार्षद के इस्लामी मान्यताओं का हवाला देते हुए राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार करने पर विवाद उत्पन्न हो गया।

नगर निगम के बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार कर दिया। इससे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षद भड़क गए और उन्होंने सभापति मुन्नालाल यादव की आसंदी के पास पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की।

हंगामे के बीच सभापति ने फौजिया को सदन से बाहर चले जाने के निर्देश दिए।

कांग्रेस पार्षद ने संवाददाताओं से कहा कि उनका मजहब इस्लाम उन्हें ‘वंदे मातरम्’ गाने की इजाजत नहीं देता।

उन्होंने कहा कि उन्हें एक नागरिक के तौर पर संविधान के तहत पूरी धार्मिक आजादी हासिल है और कोई भी व्यक्ति उन्हें ‘वंदे मातरम्’ गाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

बाद में विवाद बढ़ने पर फौजिया ने कहा कि वह राष्ट्र गीत का सम्मान करती हैं और आइंदा भी करती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि वह नगर निगम के सम्मेलन में दूषित पेयजल का मुद्दा उठाने के वास्ते बोलने के लिए खड़ी हुई थीं, लेकिन बुनियादी मुद्दों से सदन का ध्यान भटकाने के इरादे से भाजपा पार्षदों ने उनसे कहा कि पहले वह ‘वंदे मातरम्’ गाएं।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से कांग्रेस पार्षद के इनकार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि वह नगर निगम के सम्मेलन में जान-बूझकर देर से आती हैं ताकि उन्हें राष्ट्र गीत के सामूहिक गायन में शामिल न होना पड़े।

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने विवाद से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर फौजिया की ‘व्यक्तिगत राय’ से पार्टी कोई सरोकार नहीं रखती।

उन्होंने कहा,‘‘हिंदुस्तान के हर नागरिक की रग-रग में वंदे मातरम् समाया है। राष्ट्र गीत गाना हर नागरिक के लिए अनिवार्य होना चाहिए।’’

माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना सात नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के अवसर पर की थी। मातृभूमि की वंदना में गाए गए इस तराने को 1950 में राष्ट्र गीत के रूप में अपनाया गया था।

‘वंदे मातरम्’ पहली बार साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था।

भाषा हर्ष राजकुमार

राजकुमार


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