दमोह: Heavy Rain in Damoh: दमोह में लगातार हो रही बारिश ने नगर पालिका और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। बीते 2 घंटों की मूसलाधार बारिश ने जिला अस्पताल, किल्लाई नाका, विजयनगर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से लेकर ग्राम आम चोपड़ा तक पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर दिया है।
Heavy Rain in Damoh: शहर की मुख्य सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। नालों और नालियों की सफाई न होने के कारण पानी का निकास पूरी तरह से बंद है जिससे बारिश का पानी गलियों और घरों में घुसने लगा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका हर साल नालों की सफाई के नाम पर लाखों रुपए खर्च तो दिखा देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता।
Heavy Rain in Damoh:हालात यह हैं कि अगर सिर्फ 2 घंटे की बारिश ने यह हाल कर दिया है तो दो दिन लगातार बारिश हुई तो शहर और ग्रामीण इलाकों की स्थिति क्या होगी यह सोचकर ही लोग सहमे हुए हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में भी बारिश का पानी खेतों और कच्ची सड़कों पर भर जाने से आवाजाही पूरी तरह ठप होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रशासन ने ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं किया तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
Heavy Rain in Damoh: दमोह वासियों ने नगर पालिका और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द नालों की सफाई कराने और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है ताकि बरसात में शहरवासियों को जलभराव की परेशानी से न जूझना पड़े।
दमोह में जलभराव की मुख्य वजह नालों और नालियों की समय पर सफाई न होना है। पानी के निकासी मार्ग बंद हो जाते हैं जिससे बारिश का पानी सड़कों और घरों में भर जाता है।
"जलभराव" से निपटने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार अभी तक प्रशासन की ओर से सिर्फ कागजों पर सफाई दिखाई गई है। लोग मांग कर रहे हैं कि नगर पालिका तत्काल सफाई अभियान चलाए और ड्रेनेज सिस्टम सुधार करे।
क्या "जलभराव" का असर ग्रामीण क्षेत्रों पर भी पड़ा है?
हाँ, बारिश का पानी खेतों और कच्ची सड़कों में भर जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवाजाही बाधित हो रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है।
"दमोह बारिश समाचार" की जानकारी कहां मिल सकती है?
दमोह में बारिश और जलभराव की ताज़ा जानकारी स्थानीय समाचार चैनलों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया अपडेट्स से प्राप्त की जा सकती है।
क्या "जलभराव" से कोई स्वास्थ्य समस्या हो सकती है?
जी हां, जलभराव के कारण गंदा पानी घरों और गलियों में भर जाता है, जिससे मच्छर जनित बीमारियाँ जैसे डेंगू, मलेरिया आदि का खतरा बढ़ जाता है।