Bengal SIR: वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता दीदी! खुद अदालत में रखा पक्ष, कहा- “बंगाल को टारगेट, असम को क्यों नहीं?”

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Bengal SIR: वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता दीदी! खुद अदालत में रखा पक्ष, कहा- "बंगाल को टारगेट, असम को क्यों नहीं?"

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  • Publish Date - February 4, 2026 / 05:37 PM IST,
    Updated On - February 4, 2026 / 05:37 PM IST

Bengal SIR | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट में पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने खुद पेश होकर दलीलें दीं
  • ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए हो रहा है
  • अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी

कोलकाता: Bengal SIR पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी खुद पहुंची हुई थी। इस दौरान उन्होंने खुद जाकर तर्क दिए हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने न्याय की मांग को लेकर कई बार चुनाव आयोग को पत्र लिखे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टोकते हुए कहा कि राज्य की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दीवान ने दलील चुके हैं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी निर्दोष नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। फिलहाल इस मामले की सुनवाई समाप्त हो गई और अब अलली सुनवाई 9 फरवरी सोमवार को होगी। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की ये अपील

SIR Controversy सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद आखिरी में सीएम ममता बनर्जी ने लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की अपील करते हुए कहा कि ‘कृपया जनता के अधिकारों की रक्षा करें।’ पश्चिम बंगाल से जुड़े इस मामले में सुनवाई फिलहाल समाप्त हो गई है और अब अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

सीएम ममता बनर्जी ने लगाया ये आरोप

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को उन्होंने कई अहम तथ्य बताए थे, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने साफ किया कि ममता बनर्जी की नई याचिका में कुछ नए मुद्दे जरूर उठाए गए हैं, लेकिन जिन बातों का वह जिक्र कर रही हैं, वे पहले ही उनके वकीलों द्वारा अदालत के सामने रखी जा चुकी हैं।

वोटर्स के नाम हटाए जा रहे हैंः ममता बनर्जी

उन्होंने बताया कि SIR का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं, घर बदलने वाले लोगों और छोटे फ्लैट खरीदने वाले गरीब परिवारों के नाम बिना किसी सही प्रक्रिया के हटाए जा रहे हैं, जिसे बाद में “लॉजिकल गड़बड़ी” या “गलत मैपिंग” जैसे अस्पष्ट नामों से सही ठहराया जा रहा है, जो कोर्ट के निर्देशों का साफ उल्लंघन है।

आधार को वैध सबूत के तौर पर स्वीकार करने के कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए, उन्होंने सवाल किया कि बंगाल को ही ऐसे दस्तावेज़ क्यों नहीं दिए जा रहे हैं जो दूसरी जगहों पर स्वीकार किए जाते हैं, जैसे कि डोमिसाइल या जाति प्रमाण पत्र। उन्होंने पूछा, “चुनावों की पूर्व संध्या पर सिर्फ बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया गया?”

असम में ऐसा क्यों नहीं हो रहा

उन्होंने 24 साल बाद अचानक लाई गई जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया, जिसे तीन महीनों में, फसल कटाई के मौसम और सबसे ज़्यादा पलायन के समय में जल्दबाजी में किया गया, और इसके मानवीय नुकसान को रिकॉर्ड पर रखा: 100 से ज़्यादा मौतें, BLO की मौतें, और बड़े पैमाने पर लोगों का अस्पताल में भर्ती होना। उन्होंने पूछा, “अगर यह असली सुधार था, तो असम में क्यों नहीं? सिर्फ बंगाल में ही क्यों?”

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SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) क्या है?

यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसमें नामों की पुष्टि, सुधार और हटाने का काम किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी क्यों गईं?

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया और बड़ी संख्या में लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख क्या रहा?

कोर्ट ने कहा कि किसी भी निर्दोष नागरिक को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा।