(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)
भोपाल, दो अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के परिणाम का यूं तो राज्य सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका संदेश दूरगामी असर दिखाएगा क्योंकि यह उपचुनाव कथित युवा आक्रोश, ‘जेन-जेड’ आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसी राष्ट्रीय घटनाओं की पृष्ठभूमि में हुआ है।
जानकारों के मुताबिक इस उपचुनाव का परिणाम वर्ष 2028 में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व की दशा और दिशा भी तय करेगा।
दतिया में 30 जुलाई को मतदान संपन्न हुआ, जिसमें 71.44 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतों की गिनती के बाद तीन अगस्त को परिणाम आएगा। मतगणना के मद्देनजर दतिया में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई और सुबह आठ बजे से यह शुरू होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने बताया कि सुबह आठ बजे सबसे पहले डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गणना होगी और इसके बाद सुबह साढ़े आठ बजे से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मतों की गिनती शुरू की जाएगी।
प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक एवं लेखक रशीद किदवई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि दतिया सीट भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
उन्होंने कहा कि यह उपचुनाव जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन में सामने आए छात्रों के आक्रोश और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में हुआ है।
किदवई ने कहा कि यदि परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आता है तो इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि उपचुनाव केवल दतिया में ही नहीं, बल्कि गुजरात के वडोदरा जिले की मांजलपुर विधानसभा सीट और बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर भी हुआ है। उनके अनुसार, बांकीपुर सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए भी दतिया सीट प्रतिष्ठा का विषय है क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से उसके उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी।
किदवई ने कहा, ‘‘यदि कांग्रेस यह सीट जीतती है तो वह इसे युवा आक्रोश से जोड़ते हुए दावा करेगी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।’’
लेखक ने कहा कि दतिया उपचुनाव का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भाजपा ने इस बार पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया। ऐसे में इस चुनाव के परिणाम का असर उनके राजनीतिक भविष्य पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि भाजपा हारती है तो नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठेंगे और इस हार के कारणों की गहन समीक्षा की जाएगी।’’
किदवई के अनुसार, कुल मिलाकर दतिया उपचुनाव मध्यप्रदेश से अधिक राष्ट्रीय राजनीतिक परिप्रेक्ष्य वाला चुनाव बन गया है और इसके परिणाम का व्यापक राजनीतिक विश्लेषण किया जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि इस उपचुनाव का परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ. मेहरोत्रा ने कहा कि यदि कांग्रेस जीतती है तो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की संगठन में स्थिति और मजबूत होगी। वहीं भाजपा की जीत मुख्यमंत्री मोहन यादव की राजनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगी। हालांकि, हार की स्थिति में पार्टी के भीतर उनका विरोधी खेमा सक्रिय हो सकता है।
शिक्षाविद एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर कमलाकर सिंह ने कहा कि दतिया उपचुनाव के परिणाम को स्थानीय मुद्दों, हालिया ‘जेन-जेड’ आंदोलन और चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद बनी जनभावना के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘जेन-जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है, जिसका जन्म वर्ष 1997 से 2012 के बीच हुआ है। यह पीढ़ी तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है और इसे ‘डिजिटल नेटिव्स’ भी कहा जाता है क्योंकि इनका जीवन स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ा माना गया है।
कमलाकर सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यदि परिणाम भाजपा के पक्ष में आता है तो इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा और मुख्यमंत्री मोहन यादव की नीतियों को मिले जनसमर्थन के रूप में देखा जाएगा। वहीं यदि कांग्रेस जीतती है तो यह संदेश जाएगा कि उसका संगठन प्रदेश में मजबूत हो रहा है।
उन्होंने बांकीपुर और मांजलपुर विधानसभा उपचुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इन चुनावों में भाजपा को झटका लगता है तो इसके राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं और इसका असर केंद्र तथा राज्यों की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।
उन्होंने कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उनके नेतृत्व में यह पहला चुनाव है।
दतिया सीट पर प्रमुख मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच माना जा रहा है। आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव सहित 19 अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं।
भाजपा ने इस बार राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया। मिश्रा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से पराजित हुए थे।
दिल्ली की एक अदालत ने इसी साल अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया।
मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 164, कांग्रेस के 64 और भारत आदिवासी पार्टी का एक विधायक है।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत