Devi Tara Mai: ऊंचे पहाड़ों पर बसा है देवी तारा माई का दरबार, इस मंदिर में मंगलवार के दिन देवी की साधना का है विशेष महत्व |

Devi Tara Mai: ऊंचे पहाड़ों पर बसा है देवी तारा माई का दरबार, इस मंदिर में मंगलवार के दिन देवी की साधना का है विशेष महत्व

Devi Tara Mai: ऊंचे पहाड़ों पर बसा है देवी तारा माई का दरबार, इस मंदिर में मंगलवार के दिन देवी की साधना का है विशेष महत्व

Edited By :   Modified Date:  April 14, 2024 / 01:42 PM IST, Published Date : April 14, 2024/1:42 pm IST

दतिया।Devi Tara Mai: इस समय देशभर में चैत्र नवरात्र की धूम है हर तरफ देवी मंदिरों में माता के जयकारे सुनाई दे रहे हैं तो वहीं देवी साधकों को 10 महाविद्याओं की साधना में लीन देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश के दतिया में ऊंची चोटी पर पहाड़ियों से घिरा देवी तारा माई का मंदिर है जिसे पंचम कवि की टोरिया के नाम से ख्याति मिली हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 44 के निकट यह स्थान बियाबान जंगल में है। मंदिर के ठीक नीचे रेल मार्ग भी है। देवी तारा माता को 10 महाविद्याओं में दूसरे स्थान पर गिना जाता है। देवी तारा माता को तंत्र साधना में अग्रणी स्थान मिला हुआ है। माता तारा को नील सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है।

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देवी साधक एवं पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी जी महाराज ने पंचम कवि की टोरिया पर देवी तारा माता के विग्रह की स्थापना संवत 1997 मैं श्री यंत्र पर कराई तब से अब तक यह जागृत तारापीठ देवी साधकों के लिए मनोवांछित फलों की प्राप्ति का स्थान बना हुआ है। देर रात्रि को यहां देवी साधक माता तारा की साधना तंत्रोक्त विधि से करते हैं। बता दें कि दतिया में स्थित पंचम कवि की टोरिया पर तकरीबन 460 साल पहले का स्थान भैरव जी का है। इसके बाद पीतांबरा मंदिर के पीठाधीश्वर श्री स्वामी जी महाराज देवी तारा माता की स्थापना पंचम कवि की टोरिया पर कराई।

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पंचम कवि की टोरिया एवं तारा मां के मंदिर में पहुंचने के लिए देवी भक्तों को लगभग 200 सीढ़ियां चड़कर जाना पड़ता है। तारा मां के इस मंदिर में अनेकों साधकों ने आकर एकांतवास किया और देवी की साधना की। यह मंदिर एकांतवास के लिए और देवी साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस स्थान पर समय-समय पर ही भक्तों की भीड़ नजर आती है। देवी भक्त साधना में लीन देखे जाते हैं।

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तंत्रोक्त विधि से होती है मां की साधना

महाविद्याओं में से दूसरे नंबर पर जिनका नाम गिना जाता है वह सिद्धात्रि दयालु माता देवी तारा है। देवी ग्रंथों की माने तो ऋषि वशिष्ठ जी ने देवी तारा की उपासना की थी । दतिया तारा मंदिर में देवी साधक बड़ी संख्या में पंचम कवि की टोरिया पर स्थित मंदिर में साधना के लिए आते हैं। मंगलवार के दिन मां देवी तारा की उपासना साधना का विशेष महत्व है। रात्रि कालीन साधना देवी साधक तंत्रोक्त विधि से किया करते हैं। मां देवी तारा अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और मनोवांछित फलों को प्रदान करती है।

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तंत्र साधना का मंदिर 

Devi Tara Mai: देवी तारा मंदिर में माता तारा देवी के अलावा अति प्राचीन शिवालय भी है। इसके अलावा श्री हनुमान मंदिर, काली मंदिर एवं भगवान गणेश के विग्रह है। चैत्र नवरात्र के मौके पर देशभर में माता के जयकारे हर तरफ सुनाई दे रहे हैं । मध्य प्रदेश में स्थित तारा माता का मंदिर ऐतिहासिक एवं धार्मिक विशेषताओं को अपनी गोद में समेटे हुए हैं। तंत्र साधना का सबसे अलग यह मंदिर है। और देवी साधक यहां एकांतवास करते हुए माता की साधना करते हैं।

 

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