सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल, सख्ती के बावजूद आखिर माफिया कैसे बेखौफ होकर कर रहे कब्जा?

सख्ती के बावजूद आखिर माफिया कैसे बेखौफ होकर कर रहे कब्जा? Despite the strictness, how are the mafia taking possession fearlessly?

  •  
  • Publish Date - October 1, 2021 / 11:44 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:21 PM IST

ग्वालियर: मध्यप्रदेश के कई जिलों में माफिया अवैध कब्जा कर रहे हैं। गरीबों की जमीन इनके निशाने पर तो रहती ही है। सरकारी जमीन पर भी कब्जा जमाने में उन्हें डर नहीं लगता। कमलनाथ सरकार जब सत्ता में आई थी तो 22 दिन में करोड़ों की जमीन कब्जा मुक्त करवाई थी, लेकिन एक बार फिर उन जमीनों पर कब्जा शुरू हो गया है। जिस पर विपक्ष आरोप लगा रहा है। कई सवाल खड़े कर रहा है।

Read More: पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, राज्य सरकार के खिलाफ दिया था विवादित बयान

मध्यप्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने एंटी माफिया अभियान चलाया था। अकेले ग्वालियर की बात करें तो पहले चरण की कार्रवाई में 500 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की 139 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई थी। दूसरे और तीसरे चरण में करीब 600 बीघा जमीन को माफिया के चंगुल से मुक्त करवाई थी। 22 दिन तक चली इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने फिर कभी ध्यान नहीं दिया। हालात ये हैं कि माफिया दोबारा कब्जा कर रहे हैं, जिस पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है।

Read More: कांग्रेस से पार्टी नहीं संभल रही, तो देश क्या संभालेंगे? इस राज्य के मुख्यमंत्री ने किया करारा प्रहार

ग्वालियर में एंटी माफिया अभियान के तहत प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया था। गिरवाई नाके पर 18 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन पर संचालित ढाबा तोड़ा गया था, जहां दोबारा कब्जा शुरू हो गया है। केदारपुर में दयाल कॉलेज के पास से 3 बीघा और इसी क्षेत्र में किसानों से 40 बीघा जमीन मुक्त कराई थी। महाराजपुरा में सरकारी जमीन को मुक्त कराने के बाद जमीन उद्योग विभाग को सौंपी थी। सिरोल में हाईवे किनारे की 20 बीघा जमीन माफिया से मुक्त करवाई थी। चीनोर में ग्वालियर एग्रीकल्चर कंपनी की जमीन को शासकीय घोषित किया था। सिटी सेंटर में बिना अनुमति बनाए गए होटल लॉ सफायर को तोड़ा गया था। कलेक्ट्रेट के पास हाईकोर्ट को आवंटित 8 बीघा जमीन से कब्जा हटाया गया था। कालपी ब्रिज के पास होटल नारायणम का हिस्सा तोड़ा गया था। होटल प्रभा से कब्जा हटाया गया था। जलालपुर-अकबरपुर 54 बीघा जमीन मुक्त कराई थी। बेहटा में कॉलोनाइजर के कब्जे से 8 बीघा जमीन मुक्त कराई गई थी। सिरोल में अवैध कॉलोनी के निर्माण तोड़कर 5 बीघा जमीन मुक्त कराई थी।

Read More: पटरी पर दौड़ी भारत की पहली एसी पार्सल ट्रेन, यात्री कोचों का भी किया गया इस्तेमाल

प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर माफिया के निर्माण तो नष्ट कर दिए थे। लेकिन प्रशासन की नजर हटते ही भू माफिया एक बार फिर अपनी बिल्डिंग निर्माण कर रहे हैं, जिस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि सख्ती के बावजूद आखिर माफिया कैसे बेखौफ कब्जा कर रहे हैं?

Read More: गोबर के बिजली से चलेंगी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की मशीनें, सीएम भूपेश कल करेंगे परियोजना का शुभारंभ