सबको लगने लगा है कि निर्वाचन आयोग ‘सत्तारूढ़ दल का औजार’ बनकर रह गया है: तन्खा

सबको लगने लगा है कि निर्वाचन आयोग ‘सत्तारूढ़ दल का औजार’ बनकर रह गया है: तन्खा

सबको लगने लगा है कि निर्वाचन आयोग ‘सत्तारूढ़ दल का औजार’ बनकर रह गया है: तन्खा
Modified Date: November 25, 2025 / 07:12 pm IST
Published Date: November 25, 2025 7:12 pm IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 25 नवंबर (भाषा) देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग पर हड़बड़ी मचाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने मंगलवार को कहा कि सबको लगने लगा है कि यह संवैधानिक निकाय ‘सत्तारूढ़ दल का औजार’ बनकर रह गया है।

तन्खा ने इंदौर में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि देश में मतदाताओं की बेहद बड़ी तादाद के मद्देनजर आखिर 30 दिन के भीतर एसआईआर की प्रक्रिया कैसे पूरी हो सकती है?

उन्होंने कहा,‘‘एसआईआर के काम में लगे कई बूथस्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की दिल के दौरे से मौत हो रही है। एसआईआर को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? एसआईआर की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने या चार महीने का वक्त भी तय किया जा सकता था।’

तन्खा ने कहा,‘‘निर्वाचन आयोग इस तरह की हड़बड़ी मचाकर आखिर क्या साबित करना चाहता है? आयोग एक संवैधानिक निकाय है और उसे पूरा देश सम्मान की निगाह से देखता है। लेकिन वह ऐसी हरकत करेगा, तो लोग उस पर विश्वास कैसे करेंगे?’’

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने कहा,‘‘ऐसा कतई नहीं लगना चाहिए कि आयोग एक सियासी पार्टी के कहने पर यह सब कर रहा है, लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि आज की परिस्थितियों में सबको लगने लगा है कि आयोग सत्तारूढ़ दल का औजार बनकर रह गया है।’’

तन्खा ने दावा किया कि जिस तरह से एसआईआर की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है, उससे देश को परेशानी ज्यादा हो रही है और इससे समाधान कम निकलेगा।

संविधान दिवस की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ वकील ने आरोप लगाया कि देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

तन्खा ने कहा,‘‘सरकार कहती है कि हमें दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनना है। इसके लिए सरकार को सबसे पहले प्रजातांत्रिक भावना का सम्मान करना होगा।’’

भाषा हर्ष संतोष

संतोष


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