चीता परियोजना के चार साल: 52 फल-फूल रहे हैं, 32 का जन्म भारत में हुआ

चीता परियोजना के चार साल: 52 फल-फूल रहे हैं, 32 का जन्म भारत में हुआ

चीता परियोजना के चार साल: 52 फल-फूल रहे हैं, 32 का जन्म भारत में हुआ
Modified Date: September 17, 2026 / 12:55 am IST
Published Date: September 17, 2026 12:55 am IST

श्योपुर (मध्यप्रदेश), 16 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किये गये चीता परियोजना के सफलतापूर्वक चार वर्ष पूरे होने के बाद यहां चीतों की आबादी अब 52 हो गई है, जिसमें देश में पैदा हुए 32 चीतों की संख्या भी शामिल है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने इस यात्रा को इसलिए याद किया क्योंकि चीतों के पुनर्वास के इस कार्यक्रम को 17 सितंबर को चार साल पूरे होने वाले हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया के आठ जंगली चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में विशेष बाड़ों में छोड़ा था।

मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित श्योपुर जिले के इस उद्यान का राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने इसी साल 21 जून को दौरा किया था।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी यहां चीतों के साथ घड़ियालों को छोड़ने के लिए आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए थे, जिनसे जिले में पर्यटन विकास को गति मिली।

अधिकारियों ने कहा कि जैव विविधता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण इस परियोजना को आज चार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलो से इस परियोजना की शुरूआत होने के बाद आज देश में चीतों की संख्या 52 हो गई है, जिनमें से 49 चीते श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में तथा तीन चीते गांधी सागर मंदसौर में विचरण कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कूनो का जंगल चीतों के प्रजनन के लिए सकारात्मक रहा है। प्रधानमंत्री की इस सौगात पर 17 सितंबर को सेवा संकल्प अभियान के तहत टिकटोली गेट पर वन विभाग के तत्वाधान में हजारों दीप रोशन कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया जायेगा।’’

उन्होंने कहा कि भारत से विलुप्त हुए चीतों की पुर्नबसावट की इस सफल परियोजना से श्योपुर जिले को विश्वव्यापी पहचान मिली, जिसके अच्छे प्रभाव हमारे सामने आये है।

अधिकारियों ने कहा कि आज श्योपुर जिले को चीतों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जा रहा है और इससे क्षेत्र में न केवल पर्यटन गतिविधियों को मजबूती मिली है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

भाषा सं ब्रजेन्द्र गोला

गोला


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