Ladli Behna Scheme: कितनी महिलाओं को मिल रहा है लाड़ली बहना योजना का लाभ? हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस, इन सवालों का 4 हफ्ते में मांगा जवाब

कितनी महिलाओं को मिल रहा है लाड़ली बहना योजना का लाभ? हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस, High Court issues notice to government on Ladli Behna Yojana

Ladli Behna Scheme: कितनी महिलाओं को मिल रहा है लाड़ली बहना योजना का लाभ? हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस, इन सवालों का 4 हफ्ते में मांगा जवाब
Modified Date: September 17, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: September 16, 2026 11:12 pm IST

ग्वालियरः High Court Issues Notice to Government मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने योजना के हितग्राहियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़ा पूरा डेटा भी तलब किया है।

High Court issues notice to government दरअसल, लाड़ली बहना योजना पर अब हाईकोर्ट में सवाल उठे हैं। ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर जनहित याचिका में योजना की उपयोगिता और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अनिल मिश्रा ने पक्ष रखा। मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने प्रदेश के मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर शासन से जवाब मांगा है। साथ ही लाड़ली बहना योजना के तहत कितनी महिलाओं को लाभ मिल रहा है, कितनी राशि वितरित की जा रही है और लाभार्थियों से जुड़ा पूरा विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में दावा किया गया है कि योजना पर अब तक करीब 50 से 60 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं और हर साल करीब 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का खर्च हो रहा है। याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि योजना के बावजूद महिलाओं के सशक्तिकरण का उद्देश्य कितना पूरा हो रहा है और योजना का प्रदेश के वित्तीय भार पर क्या असर पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहना हितग्राही बताए गए हैं। वर्तमान में प्रत्येक महिला को 1,500 रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। 2026-27 के बजट में योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। याचिका के मुताबिक हर महीने सरकार पर करीब 1,875 करोड़ रुपए का सीधा वित्तीय भार आता है।


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