शह मात The Big Debate: ‘संन्यास’ पर संग्राम! हर्षा रिछारिया के संन्यास पर बंटे साधु समाज, क्या उनका साध्वी बनना महज पब्लिसिटी स्टंट या कुछ और?

'संन्यास' पर संग्राम! हर्षा रिछारिया के संन्यास पर बंटे साधु समाज, Harsha Richharia is associated with spirituality

शह मात The Big Debate: ‘संन्यास’ पर संग्राम! हर्षा रिछारिया के संन्यास पर बंटे साधु समाज, क्या उनका साध्वी बनना महज पब्लिसिटी स्टंट या कुछ और?
Modified Date: April 23, 2026 / 11:36 pm IST
Published Date: April 23, 2026 11:36 pm IST

भोपालः Harsha Richharia’s retirement मॉडल हर्षा रिछारिया संन्यास लेकर हर्षानंद गिरि की एक नई पहचान के तौर पर सबके सामने आईं। इसके बाद से हर्षा रिछारिया, हर दिन पूरे ग्लैमरस अंदाज में अपने संन्यास और अध्यात्म से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया में अपलोड कर रही हैं। इसी के चलते नया विवाद शुरु हो गया है। संत समाज के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज हर्षा के साध्वी बनने पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि हर्षानंदगिरि कब कहा गिर जाएं कोई भरोसा नहीं। ये कोई माता सीता नहीं हैं, पिंडदान कोई मजाक नहीं। ये पब्लिसिटी पाने के लिए सनातन का मज़ाक बना रही हैं वे यहीं नहीं रुके उन्होंने आशंका जताई है कि इसके पीछे विदेशी फंडिंग भी हो सकती है।

Harsha Richharia’s retirement वहीं हर्षा के समर्थन में जूना अखाड़ा उतर आया, अखाड़े का कहना है कि- संन्यास कोई योजना नहीं, अचानक घटित होने वाली अनुभूति है। अमीर-गरीब, राजा- रंक, किसी के साथ भी संन्यास का भाव घटित हो सकता है। कुल मिलाकर हर्षा रिछारिया के हर्षानंद गिरि बनने के मामले ने नई बहस ज़रूर छेड़ दी है, लेकिन सवाल ये है कि संन्यास का अर्थ जब सभी सांसारिक मोहों का नाश होता है तो संन्यास के बाद भी हर्षा सोशल मीडिया में लगातार वीडियो क्यूँ अपलोड कर रही हैं? सवाल ये कि एक बार पहले भी वे दीक्षा लेकर फिर ग्लैमर की दुनिया में लौटने का सगर्व ऐलान कर चुकी हैं, तो इस बात की क्या गारंटी है कि इस बार की उनकी विरक्ति स्थायी होगी? सवाल आपत्ति उठाने वालों से भी कि संन्यास लेना निहायत निज़ी विषय है फिर वे कैसे इस पर सवाल उठा सकते हैं? क्या वे इसके लिए अधिकृत हैं?

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।