IBC24 Janjatiya Pragya: हिंदी में MBBS की पढ़ाई की योजना कैसे हुआ साकार? मंत्री विश्वास सारंग ने कैसे इस नवाचार को किया लागू, क्या-क्या आई मुसीबतें

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IBC24 Janjatiya Pragya: हिंदी में MBBS की पढ़ाई की योजना कैसे हुआ साकार? मंत्री विश्वास सारंग ने कैसे इस नवाचार को किया लागू, क्या-क्या आई मुसीबतें

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  • Publish Date - December 2, 2025 / 06:13 PM IST,
    Updated On - December 21, 2025 / 10:48 PM IST

(IBC24 Janjatiya Pragya / Image Credit: IBC24 News)

भोपाल: IBC24 Janjatiya Pragya मध्यप्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने पर IBC24 आज एक महामंथन करने कर रहा है। जिसकी शुरूआत दोपहर दो बजे से हो चुकी है, राजधानी भोपाल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं और उपलब्धियों पर संवाद के साथ जनजातीय समाज के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर विमर्श किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव समेत प्रदेश की कई बड़ी शख्सियत IBC24 के मंच पर भविष्य का रोड मैप बताएंगे।

IBC24 Janjatiya Pragya हिंदी में MBBS की पढ़ाई को लेकर मंत्री सारंग ने कही ये बात

इसी कड़ी में IBC24 के मंच पर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुझे बहुत प्रसन्नता है कि जब मैं चिकित्सा शिक्षा मंत्री था, उस समय हमने एक बीड़ा उठाया था कि हम हिंदी में एमबीबीएस की शुरुआत करेंगे और वह सपना हमारा साकार हुआ और हमने चारों साल को में की किताबों को हमने हिंदी में ट्रांसलिटेटरेट किया। बहुत सफल प्रयोग हुआ। माननीय अमित शाह जी ने उसको इनोगेट किया था और मुझे बहुत प्रसन्नता है कि मध्य प्रदेश इकलौता राज्य बना है जिसने हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की है। हिंदी भाषी क्षेत्र हिंदी बोलने वाले बच्चों को एक लर्निंग के लिए उनको सीखने के लिए एक अच्छा प्लेटफार्म हमने उपलब्ध कराया और मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि इसका कहीं विवाद नहीं हुआ क्योंकि हमने अंग्रेजी और हिंदी में झगड़े की बात नहीं की। हमने जो पॉपुलर किताबें थी उन्हीं का ट्रांसलिटेटरेशन करके हिंदी में उनको प्रोवाइड कराया। तो एक सफल प्रयोग है और मुझे जो अभी जानकारी मिली है कि पूरे देश में अब इसको लागू करने का अह का केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है और केवल हिंदी ही नहीं लोकल जो भाषाएं हैं, क्षेत्रीय भाषाएं हैं, उसमें भी इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं। मुझे लगता है मेडिकल साइंस में ये एक बहुत ही सुखद और दूरगामी परिणाम देके जाएगा कि लोकल भाषा में भी हम एमबीबीएस को पढ़ा पाएं। हम दुनिया की बात करें तो बहुत सारे डेवलप्ड कंट्री भी अपनी राष्ट्रभाषा में ही एमबीबीएस या डॉक्टरी की पढ़ाई कराते हैं। केवल हिंदुस्तान में यह होता था कि बिना अंग्रेजी के नहीं होगा। पर हमने उस जो ग्रंथि है उसको खत्म करने का काम किया।