#IBC24MINDSUMMIT | Source : IBC24
भोपाल: IBC24MINDSUMMIT, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार यानी आज को देश की दिग्गज हस्तियां मध्यप्रदेश के सरोकार से जुड़े विषयों पर अपनी राय जाहिर करने के लिए एक मंच पर आ रही हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद चैनल IBC24 ये मंच मुहैया करा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। पहले सेशन में IBC24 के इस महामंच में राज्यसभा सांसद सुमित्रा बतौर गेस्ट शामिल हुई। उन्होंने कई मुद्दे पर खुलकर बात की है।
विजयपुर उपचुनाव में भाजपा की हार को लेकर सुमित्रा ने कहा कि कई बार पार्टी को समझौता करना पड़ता है। कई अंदरूनी किस्से होते हैं, जिसे सार्वजनिक मंचों पर नहीं कहा जा सकता है। विजयपुर में कांग्रेस की जीत को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अभी ऑक्सीजन नहीं मिल सकती है। कांग्रेस पार्टी अभी कोमा में है। कांग्रेस के लिए आगे की लक्ष्य प्राप्ति की कल्पना भी संभव नहीं है। मध्यप्रदेश की जनता भाजपा के कामों से संतुष्ट है। हमारे कार्यकर्ता प्रदेश के घरों तक पहुंचते हैं।
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राजनीति को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीति चिकनी मिट्टी है। इस पर संभल के पैर रखने पड़ते हैं। मैं मानती हूं कि राजनीति में काम करने के दौरान हमारे इर्द-गिर्द कई चुनौतियां आती है। इन चुनौतियों के बीच हमारा आत्मविश्वास अडिग रहे, इसका भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। नहीं तो राजनीति की चकाचौंध अच्छे-अच्छों को डिगा देती है। राजनीति में लोगों को लाभान्वित करने का प्रयास होना चाहिए। खुद के लाभ के लिए काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत स्वयं से होना चाहिए। लोगों हित के बारे में सोचकर हमारी नींद हराम हो जाना चाहिए। राजनीति वह ब्रह्मास्त्र है, जो लोगों के लिए संजीवनी के काम करता है। यह वह भी अस्त्र है जो लोगों को घायल कर सकता है। यह राजनेता के उपर निर्भर करता है।
विधेयकों के कानून बनने और संसोधनों के सवालों को लेकर कोई भी विधेयक सीधे कानून नहीं बन जाता है। पहले सदन में विधेयक लाया जाता है। सामने विपक्ष होता है। उनसे चर्चा की जाती है। उसके बाद विधेयक सदन में पारित होता है। दलितों की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान समय में दलित समाज की स्थिति बेहद सम्मानजनक है। पहले दलित समाज के लोग पोखरों और तलाबों में पानी पीते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पीएम मोदी का सपना है कि एक ही पाइप लाइन का पानी गरीब-अमीर, छोटे और बड़े सभी वर्ग के लोग पीएं। यह कल्पना पहले भी हो जाना चाहिए था, लेकिन नहीं हुआ है। हवा और पानी और फसलों के उदाहरण के जरिए उन्होंने कहा कि प्रकृति से पैदा हुए चीजों पर सभी का अधिकार है। इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
महिलाओं की परेशानियां दूर करने के प्रयासों से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं अभी भी महिलाओं की समस्या जानने उनके घरों तक जाती हूं। हर घर की महिलाओं तक मेरा हृदयस्पर्शी संबंध है। मैं महिलाओं की समस्याओं पर अंदर तक रूचि लेती हूं और समस्याओं को दूर करने की कोशिश करती हूं। जब कोई बेटी शादी होकर आती है और नए घर में समन्वय नहीं कर पाती तो कई परेशानियां होती है। सास-बहू के बीच में झगड़ा होता है तो मैं उनके बीत समन्वय ब्रिज के रूप में काम करती हूं। किसी के पति को रात को पुलिस उठाकर ले जाती थी और महिला मेरे पास आती थी तो मैं उतनी ही रात को थाने पहुंच जाती थी। कई बार तो थाना प्रभारी के साथ विवाद की स्थिति बन जाती था।