जबलपुर, 27 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन पिछले एक दशक में करीब चार गुना बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात बढ़कर करीब 39,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
सिंह ने यहां ‘व्हीकल फैक्टरी जबलपुर’ (वीएफजे) में टी-सीरीज के युद्धक टैंकों के मरम्मत व रखरखाव के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली सुविधा की आधारशिला रखने के बाद यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘घरेलू रक्षा (हथियार और गोला-बारूद) उत्पादन 2014 में 46,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात भी 2014 के करीब 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 39,000 करोड़ रुपये हो गया है।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
सिंह ने कहा कि भारत न केवल देश में हथियारों का निर्माण कर रहा है, बल्कि उनके रखरखाव, मरम्मत और उन्नयन की क्षमता भी विकसित कर रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘आज की परियोजना आत्मनिर्भरता की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में भारत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत देश के रूप में उभरेगा।’’
सिंह ने टैंक मरम्मत परियोजना को भारत के आत्मनिर्भर औद्योगिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।
उन्होंने भरोसा जताया कि नई सुविधा निर्धारित समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरी होगी। इसके तहत हर साल ‘टी-72’ और ‘टी-90’ के 80 टैंकों की मरम्मत की जाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना को हर साल ऐसे करीब 230 टैंकों की मरम्मत की जरूरत होती है। चेन्नई के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्टरी (एचवीएफ) फिलहाल सालाना करीब 150 टैंकों की मरम्मत करती है और वीएफजे में बनने वाली नई सुविधा शेष कमी को पूरा करेगी।
टैंक मरम्मत सुविधा वीएफजे में स्थापित की जा रही है, जो आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) के तहत संचालित प्रमुख सैन्य वाहन विनिर्माण इकाई है।
अधिकारियों ने बताया कि 1969 में स्थापित इस फैक्टरी में शुरुआत में जर्मनी की एम.ए.एन. के सहयोग से ‘शक्तिमान 3टी’ वाहन तथा जापान की निसान मोटर्स कंपनी के सहयोग से ‘निसान 1टी’ और जोंगा वाहनों का उत्पादन किया जाता था।
उन्होंने बताया कि फैक्टरी परिसर 330 एकड़ में फैला है, जबकि इससे लगा एस्टेट 600 एकड़ में है।
भाषा दिमो शफीक
शफीक