Chandra Grahan 2026 Timing: कल रक्षाबंधन पर लगेगा साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण! जानें किस समय भाई को राखी बांधना होगा सबसे भाग्यशाली..

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Chandra Grahan 2026 Timing: साल 2026 का दूसरा व आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा इस ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 38 मिनट की होगी। आइये जानते हैं क्या भारत में इसका प्रभाव पड़ेगा..

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 05:35 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 05:38 PM IST

Chandra Grahan 2026 Timing/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • सूतक काल का सच और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त!
  • इन देशों में दिखेगा ग्रहण का अद्भुत नज़ारा?

Chandra Grahan 2026 Timingकल यानी 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) को रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा के महापर्व पर एक अनोखा खगोलीय संयोग बनने जा रहा है। कल साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा। जब भी त्यौहार के दिन ग्रहण लगता है, तो मन में डर और उलझन होना लाज़मी है। आईये सीधे शब्दों में समझते हैं कि क्या होता है चंद्र ग्रहण? यह ग्रहण किस समय लगेगा और यह कहाँ-कहाँ पर दिखाई देगा?

Chandra Grahan Timing: चंद्र ग्रहण क्या होता है?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक सामान्य खगोलीय घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा को ढक लेती है, तो ऐसी स्थिति में चंद्र ग्रहण कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण का संबंध राहु और केतु से जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे बचने के लिए मंत्र जाप और घर के शुद्धिकरण की सलाह दी जाती है।

कितने बजे लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण?

भारतीय समयानुसार, कल सुबह से दोपहर तक इस ग्रहण की अवधि रहेगी। पंचांग के अनुसार, साल का दूसरा व आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा। इस ग्रहण की पीक टाइमिंग सुबह 9 बजकर 43 मिनट रहेगी। इस ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 38 मिनट की होगी। आइये देखते हैं कि यह ख़ूबसूरत नज़ारा कहाँ-कहाँ दिखाई देगा..

Chandra Grahan 2026 in India: यह चंद्र ग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?

सबसे अच्छी खबर यह है कि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। दिन में लगने के कारण भारत पर इसका कोई असर नहीं होगा और न ही सूतक काल में लागू होगा। हालांकि, दुनिया के कई हिस्सों में यह अद्भुत नज़ारा साफ़-साफ़ देखा जा सकेगा। इसे उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप (जर्मनी, इटली, स्पेन, फ्रांस, यूके, ब्रिटेन), अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के कुछ इलाकों में आसानी से देखा जा सकेगा।

Rakshabandhan 2026 Chandra Grahan: रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव?

शास्त्रों के नियमानुसार, जो ग्रहण आँख से दिखाई न दे, उसका कोई धार्मिक या सूतक प्रभाव नहीं होता:

  • चूँकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए यहाँ कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा।
  • बिना किसी डर या संकोच के बहने अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।
  • कल (28 अगस्त 2026) को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक रहेगा।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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क्या 28 अगस्त 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं, यह चंद्र ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। चूंकि ग्रहण के समय भारत में दिन की रोशनी (सूरज की रोशनी) होगी, इसलिए भारतीय भूभाग पर यह अदृश्य रहेगा।

रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगने से क्या सूतक काल माना जाएगा?

नहीं, शास्त्रानुसार जो ग्रहण आँखों से दिखाई नहीं देता, उसका कोई धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होता है। इसलिए भारत में सूतक काल के कोई भी नियम लागू नहीं होंगे।

ग्रहण के दिन भाई को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?

भारत में ग्रहण अदृश्य होने के कारण आप पूरे दिन राखी बांध सकते हैं। हालांकि, भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम और श्रेष्ठ रहेगा।

चंद्र ग्रहण का सटीक समय और इसका 'पीक टाइम' क्या है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, ग्रहण कल सुबह 06:55 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:30 बजे समाप्त होगा। इसका पीक टाइम (चरम समय) सुबह 09:43 बजे रहेगा, जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा को सबसे ज्यादा ढक देगी।

ग्रहण खत्म होने के बाद घर के वास्तु दोष दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?

ग्रहण समाप्त होने के बाद (दोपहर 12:30 बजे के बाद) पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें, कपूर या लोबान की धुनी जलाएं और खुद नमक वाले पानी से स्नान करके सफेद वस्तुओं (जैसे चावल, चीनी या दूध) का दान अवश्य करें।