स्वच्छ वायु सर्वेक्षण: पीएम10 के कारण शीर्ष से फिसला इंदौर, एक अंक के अंतर से लखनऊ अव्वल

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स्वच्छ वायु सर्वेक्षण: पीएम10 के कारण शीर्ष से फिसला इंदौर, एक अंक के अंतर से लखनऊ अव्वल

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 06:24 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 06:24 PM IST

इंदौर, आठ सितंबर (भाषा) स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में इंदौर के पहले पायदान से फिसलकर दूसरे स्थान पर आने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पीएम10 कणों को जिम्मेदार ठहराया है और इनके स्तर को घटाने के उपाय तेज करने की घोषणा की है।

सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर को 200 में से 197 अंक मिले, जबकि लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा।

सर्वेक्षण में 195 अंकों के साथ जबलपुर तीसरे और 192-192 अंकों के साथ भोपाल तथा आगरा संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे।

वर्ष 2025 के सर्वेक्षण में 200 में से 200 अंक प्राप्त करके शीर्ष पायदान पर रहने वाला इंदौर इस बार लखनऊ से महज एक अंक से पिछड़ गया और यह तमगा बरकरार नहीं रख सका।

इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पीएम10 कणों के मानक में पिछड़ने के कारण सर्वेक्षण में हमें लखनऊ से एक अंक कम मिला है।”

इंदौर, मध्यप्रदेश का सबसे ज्यादा वाहन घनत्व वाला शहर है।

भार्गव ने कहा कि शहर में यातायात और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण, जिसमें पीएम10 कण शामिल हैं, को कम करने के लिए पूरे साल कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यातायात सिग्नल पर ‘रेड लाइट ऑन, इंजन ऑफ’ जैसी जन जागरूकता पहल, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ई-बसों के संचालन पर तेजी से काम किया जाएगा।

भार्गव ने कहा कि घर-घर से कचरा जमा करने वाली सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने और कारखानों को डीजल के बजाय सीएनजी जैसे हरित ईंधन पर स्थानांतरित करने के लिए भी ठोस प्रयास किए जाएंगे।

पीएम10 (पार्टिकुलेट मैटर-10) हवा में मौजूद अति सूक्ष्म कण होते हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण वाहनों के धुएं, सड़कों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन से पैदा होते हैं और सांस के साथ मनुष्य के श्वसन तंत्र में चले जाते हैं।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के प्रमुख पैमानों में शहरी निकायों की ओर से पीएम10 के स्तर में कमी लाने के लिए किए जाने वाले उपाय शामिल हैं।

अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ से महज एक अंक से पिछड़ने के बावजूद इंदौर की समग्र वायु गुणवत्ता का रिकॉर्ड मजबूत रहा है।

इंदौर नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में पिछले वर्षों की तुलना में पीएम10 के स्तर में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और इस वर्ष पीएम10 का वार्षिक औसत लगभग 81 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।

राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों के तहत आवासीय, औद्योगिक और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हवा में पीएम10 का वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित किया गया है।

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की मूल्यांकन अवधि के दौरान इंदौर में 98 फीसदी से अधिक दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) औसतन 200 से नीचे बना रहा।

तय पैमाने के मुताबिक, शून्य से 50 के बीच एक्यूआई ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।

नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि धूल के नियंत्रण के लिए शहर में रोजाना लगभग 700 किलोमीटर लंबी सड़कों को मशीनों से बुहारा जा रहा है और निर्माण स्थलों के अपशिष्ट के निपटारे के लिए भी अलग-अलग उपाय किए जा रहे हैं।

इंदौर राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार आठ बार अव्वल रहा है, जो शहरों की साफ-सफाई को लेकर केंद्र सरकार की एक अलग रैंकिंग स्पर्धा है।

भाषा

हर्ष पारुल

पारुल