बिप्लब देब के लिए मप्र के ‘बड़े नेताओं’ में समन्वय बनाना चुनौती, सांगठनिक कौशल की होगी ‘परीक्षा’: विश्लेषक

बिप्लब देब के लिए मप्र के 'बड़े नेताओं' में समन्वय बनाना चुनौती, सांगठनिक कौशल की होगी 'परीक्षा': विश्लेषक

बिप्लब देब के लिए मप्र के ‘बड़े नेताओं’ में समन्वय बनाना चुनौती, सांगठनिक कौशल की होगी ‘परीक्षा’: विश्लेषक
Modified Date: September 23, 2026 / 08:29 pm IST
Published Date: September 23, 2026 8:29 pm IST

भोपाल, 23 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से मध्यप्रदेश के प्रभारी नियुक्त किए गए बिप्लब कुमार देब के लिए राज्य के ‘बड़े नेताओं’ से समन्वय स्थापित करना एक चुनौती होगी और साल 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों में अपनी सांगठनिक क्षमता दिखाने की पहली ‘अग्निपरीक्षा’ होगी।

हालांकि, भाजपा ने कहा कि देब सांगठनिक क्षमता के धनी हैं और समय-समय पर उन्होंने इसका परिचय भी दिया है।

भाजपा ने बुधवार को त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान लोकसभा सदस्य देब को मध्यप्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नवगठित टीम में महासचिव बनाए गए देब मध्यप्रदेश प्रभारी के रुप में उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य महेन्द्र सिंह की जगह लेंगे। सिंह से पहले मुरलीधर राव, विनय सहस्रबुद्धे और दिवंगत अनंत कुमार जैसे नेता मध्यप्रदेश के प्रभारी रह चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता ने कहा कि देब की पहली और सबसे बड़ी चुनौती ‘बड़े नेताओं’ में समन्वय और संवाद स्थापित करने की रहेगी।

उनका इशारा मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल तथा पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा जैसे नेताओं की ओर था।

गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘भाजपा संगठन के मामले में मध्यप्रदेश की विशेष पहचान रही है। लेकिन आज ना तो वैसा संगठन रह गया है और ना ही वैसे समर्पित कार्यकर्ता… और इसका असर भी दिखता है।’

उन्होंने इस क्रम में दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम का उल्लेख किया और पार्टी के भीतर कथित खींचतान का उल्लेख किया।

गुप्ता ने कहा कि 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं, जिसमें उनके सांगठनिक कौशल की ‘अग्निपरीक्षा’ होगी।

उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्हें पार्टी के भीतर बनी संवादहीनता की स्थिति से निपटते हुए पार्टी के जनाधार को मजबूत बनाने पर जोर देना होगा।

त्रिपुरा के एक सामान्य परिवार में जन्मे 55 वर्षीय देब 9 मार्च 2018 से 14 मई 2022 तक त्रिपुरा के 10वें मुख्यमंत्री रहे। मई 2022 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद माणिक साहा राज्य के मुख्यमंत्री बने।

इसके बाद देब ने 2022 से जून 2024 तक राज्यसभा में त्रिपुरा का नेतृत्व किया। वह 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम त्रिपुरा सीट से सांसद चुने गए।

त्रिपुरा में लंबे समय तक सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार को उखाड़कर वहां भाजपा का शासन लाने में देब का बड़ा योगदान माना जाता है। उस समय वह भाजपा की त्रिपुरा इकाई के अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में भाजपा ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी और राज्य में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 25 वर्षों के शासन का अंत किया था।

इससे पहले, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने देब की क्षमताओं पर विश्वास करते हुए मार्च 2015 में त्रिपुरा भाजपा का जनसंपर्क प्रभारी बनाया था।

भाजपा के एक नेता ने कहा कि देब पार्टी के युवा नेताओं में शुमार हैं और उन्हें सांगठनिक क्षमता का धनी माना जाता है और समय-समय पर उन्होंने इसका परिचय भी दिया है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘त्रिपुरा जैसे वामपंथ शासित राज्य में उन्होंने भाजपा को सत्ता दिलाने में भूमिका निभाई। उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया तो उनके ही नेतृत्व में राज्य में भाजपा ने तीसरी बार सत्ता में वापसी की जबकि तमाम राजनीतिक पंडित कांग्रेस की जीत सुनिश्चित बता रहे थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसी प्रकार पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में देब को ओडिशा के उन जिलों का प्रभारी बनाया था, जहां भाजपा के लिए परिस्थितियां कठिन थीं लेकिन उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य नेताओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम किया और उसके नतीजे सामने हैं।’’

पार्टी नेता ने कहा कि देब को हाल में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कोलकाता, उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना जैसे कठिन इलाकों का जिम्मा सौंपा गया था और उन्होंने इन इलाकों की करीब 49 सीटों में 26 सीटें भाजपा की झोली में डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, ‘‘देब को अभी तक जहां की भी जिम्मेदारी दी गई, वहां उन्होंने पार्टी को जीत दिलाई है।’’

पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि देब का मध्यप्रदेश से भी नाता रहा है और उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और सतना के सांसद गणेश सिंह सहित कई अन्य नेताओं के साथ बेहद करीब से काम किया है जबकि शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र सिंह तोमर जैसे नेताओं के साथ उनके निकट संबंध रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा सांगठनिक तौर पर मजबूत रही है और देब पहले भी कई मौकों पर अपनी सांगठनिक क्षमता दिखा चुके हैं, ऐसे में उन्हें बहुत परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मध्यप्रदेश में 2028 में विधानसभा के चुनाव होने हैं जबकि अगले नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव जून-जुलाई 2027 में प्रस्तावित हैं।

भाषा ब्रजेन्द्र शफीक अविनाश

अविनाश


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