ब्रिटिश हुकूमत की तरह ही मौजूदा शासन व्यवस्था में असहमति जताने वालों को प्रताड़ित किया जाता है:सिंह

ब्रिटिश हुकूमत की तरह ही मौजूदा शासन व्यवस्था में असहमति जताने वालों को प्रताड़ित किया जाता है:सिंह

Modified Date: May 27, 2026 / 07:25 pm IST
Published Date: May 27, 2026 7:25 pm IST

(तस्वीर के साथ)

भोपाल, 27 मई (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को मौजूदा शासन व्यवस्था की तुलना ब्रिटिश शासन से करते हुए कहा कि उस दौर की तरह आज भी असहमति जताने वालों को प्रताड़ित किया जाता है।

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस के विचार विभाग द्वारा आयोजित एक बौद्धिक विमर्श को संबोधित करते हुए दिग्विजय ने यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘आज की शासन व्यवस्था की तुलना आसानी से ब्रिटिश हुकूमत से की जा सकती है। उस समय भी लोगों को प्रताड़ित किया जाता था और आज भी वही हालात हैं। किसी ने भी मौजूदा हुकूमत के खिलाफ बोला तो उसके साथ क्या होता है, यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है।’’

राज्यसभा सदस्य सिंह ने पंडित नेहरू को ‘युगांतकारी’ नेता बताया और कहा जिस तरह से शिल्पकार एक मूर्तियां बनाता है, वैसे ही उन्होंने भारत का निर्माण किया।

कांग्रेस की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक सिंह ने कहा, ‘‘वह ( पंडित नेहरू) समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और विज्ञान सम्मत राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे। पंडित नेहरू चाहते थे कि देश के बच्चे तकनीकी कौशल हासिल करें और उच्च शिक्षा के माध्यम से दुनिया का मुकाबला करें।’’

उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू एक सम्यक समाज का निर्माण करना चाहते थे और वह मानते थे की सांप्रदायिकता चाहे अल्पसंख्यक की हो या बहुसंख्यक की वह देश के लिए खतरनाक ही होती है।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यपालक निदेशक राजेश बादल ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी बौद्धिक संपदा से ही अपनी पहचान बन सकता है और दुनिया की स्पर्धा में टिक सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘नेहरू को जब देश हाथ में मिला तब गरीबी थी, अंग्रेज इतना लूट कर ले गए थे कि खाने के लिए अनाज भी नहीं था। नेहरू ने सभी मोर्चों पर काम करके आत्मनिर्भर भारत का रास्ता प्रशस्त किया ।’’

प्रदेश कांग्रेस के विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि नेहरू ने जब अमरीका से इस्पात संयंत्र बनाने में सहायता मांगी और उसने इनकार किया तब उन्होंने रूस की मदद से ये संयंत्र बनाये और देश को निर्यातक बनाया।

उन्होंने कहा कि वह अपने फैसले पर अडिग रहे जबकि आज हम अपनी पसंद के देश से तेल भी नहीं खरीद सकते।

भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार

राजकुमार


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