मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी: मुख्यमंत्री यादव

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी: मुख्यमंत्री यादव

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी: मुख्यमंत्री यादव
Modified Date: July 19, 2026 / 01:49 pm IST
Published Date: July 19, 2026 1:49 pm IST

भोपाल, 19 जुलाई (भाषा) मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है, जिसे अब 20 जुलाई से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके में स्थित जगदीशपुर (पूर्व में इस्लामपुर) में आयोजित मंत्रिमंडल की विशेष बैठक में यूसीसी लागू करने संबंधी विधेयक पर मुहर लगाई गई।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे नारी सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

उन्होंने कहा कि विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति के समक्ष करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं ने जबकि 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरूषों ने इस विधेयक का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तीकरण और राष्ट्रीय एकता की मजबूती की लिए जा रहे इस विधेयक का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने का आह्वान किया।

यादव ने कहा कि समिति के समक्ष भारतीय जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों ने अपना पक्ष रखा लेकिन हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक के नजरिए से देखने वाली कांग्रेस इससे दूर रही।

उन्होंने कहा कि विधेयक में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी (टेस्ट ट्यूब बेबी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा दिए जाने का प्रावधान है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। मध्यप्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से आरंभ होगा।

समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रचलित कानूनों तथा परंपराओं का विश्लेषण कर सुझाव दिए गए हैं। इस खंड में 10 अध्याय शामिल हैं।

दूसरे खंड में प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप दिया गया है, जिसे मध्यप्रदेश में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं।

तीसरे खंड में जन-परामर्श रिपोर्ट है, जिसमें जिला, राज्य और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त सुझावों का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनका प्रश्नवार, लैंगिक पहचान के हिसाब से अलग-अलग और समुदायवार विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया है।

समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है।

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और सहजीवन (लिव-इन संबंध) जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप विधेयक का प्रारूप तैयार करने का दायित्व सौंपा था।

समिति ने अपनी अनुशंसाएं तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, विविध धार्मिक एवं पारंपरिक अनुष्ठानों को अप्रभावित रखने, प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करने तथा संवैधानिक प्रावधानों और लोकनीति के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने को आधार बनाया है।

भाषा ब्रजेन्द्र रवि कांत रंजन

रंजन


लेखक के बारे में