मप्र: गाड़ी से बांधकर घसीटे गए आदिवासी व्यक्ति की हत्या के मामले में आठ बरी, एक को उम्रकैद

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मप्र: गाड़ी से बांधकर घसीटे गए आदिवासी व्यक्ति की हत्या के मामले में आठ बरी, एक को उम्रकैद

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 05:59 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 05:59 PM IST

नीमच, 11 अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश के नीमच की एक अदालत ने वर्ष 2021 में आदिवासी समुदाय के एक व्यक्ति की हत्या के मामले में नौ आरोपियों में से आठ लोगों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, जबकि एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला लोक अभियोजन कार्यालय की ओर से मंगलवार को यह जानकारी दी गई।

विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) आलोक कुमार सक्सेना ने सात अगस्त को सुनाए फैसले में छीतर गुर्जर (36) को भारतीय दंड विधान की धारा 302 (हत्या) व अन्य प्रावधानों के तहत दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

गुर्जर पर 26 अगस्त 2021 को कन्हैयालाल भील (45) की हत्या का जुर्म साबित हुआ।

अभियोजन के एक अधिकारी ने बताया कि भील अपनी लापता पत्नी की तलाश में निकला था और सिंगोली-नीमच मार्ग पर वाहनों को रोक रहा था।

इस दौरान गुर्जर की मोटरसाइकिल भील से टकरा गई जिससे वह सड़क पर गिरकर घायल हो गया।

अधिकारी ने बताया, “दुर्घटना के विवाद में गुर्जर ने भील के साथ मारपीट की। भील को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।”

विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के साथ क्रूरतापूर्वक मारपीट करना प्रकट करता है कि गुर्जर ने घटना को इरादतन अंजाम दिया था।

घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हुआ था जिसमें नजर आया कि भील को रस्सी से बांधकर एक पिक-अप वाहन से घसीटा गया था।

पुलिस ने यह वीडियो सामने आने के बाद महेन्द्र गुर्जर, गोपाल गुर्जर, लक्ष्मण गुर्जर, अमरचन्द गुर्जर, धीरज धाकड़, सत्यनारायण गुर्जर, पारस गुर्जर और लोकेश बलाई को आरोपियों में शामिल किया था।

अदालत ने आठों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और कहा कि इस वीडियो के संदर्भ में रिकॉर्ड पर प्रामाणिक सबूत पेश नहीं किए गए।

जिरह के दौरान एक चिकित्सक के बयानों के आधार पर विशेष न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि यह बात प्रमाणित नहीं होती है कि भील को किसी वाहन से बांधकर घसीटने के कारण ही उसकी मृत्यु हुई थी।

अदालत ने कहा, “जिस प्रकृति की चोटें मृतक के शरीर पर पाई गई हैं, वे केवल घसीटने से आनी संभव नहीं हैं। ये चोटें किसी दुर्घटना के परिणामस्वरूप भी हो सकती हैं और घातक स्वरूप की मारपीट किए जाने के परिणामस्वरूप भी हो सकती हैं।”

भाषा हर्ष जितेंद्र

जितेंद्र