नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) चालू सत्र में अब तक सभी खरीफ फसलों की बुवाई के रकबे में कमी का अंतर पहले से घटकर अब पिछले साल के मुकाबले 1.82 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, इस मौसम की मुख्य फसल धान की बुवाई अब भी पिछले साल की रफ्तार से पीछे चल रही है। कृषि मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।
सात अगस्त तक, खरीफ फसलों की बुवाई 967.92 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 985.89 लाख हेक्टेयर थी।
धान की बुवाई 344.78 लाख हेक्टेयर रही, जो एक साल पहले के 360.67 लाख हेक्टेयर से 4.40 प्रतिशत कम है। दलहन और मोटे अनाज भी पीछे रहे। दालों की बुवाई का रकबा 103.78 लाख हेक्टेयर रहा जो पिछले साल 105.73 लाख हेक्टेयर में हुआ था। जबकि मोटे अनाज का रकबा पहले के 173.21 लाख हेक्टेयर के मुकाबले कम यानी 168.50 लाख हेक्टेयर ही है।
हालांकि, तिलहन ने इस रुख के उलट प्रदर्शन किया और इसका रकबा एक साल पहले के 175.01 लाख हेक्टेयर से मामूली रूप से बढ़कर 180.20 लाख हेक्टेयर हो गया।
नकदी फसलों में, गन्ने का रकबा 58.62 लाख हेक्टेयर से थोड़ा घटकर 58.31 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि कपास का रकबा 106.42 लाख हेक्टेयर के मुकाबले लगभग स्थिर 106 लाख हेक्टेयर रहा। जूट एवं मेस्टा का रकबा पहले के 6.22 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.32 लाख हेक्टेयर हो गया।
खरीफ की बुवाई आमतौर पर जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ तेज़ी पकड़ती है, लेकिन इस साल अल-नीनो मौसम पद्धति से जुड़ी बारिश की कमी के कारण बुवाई में देरी हुई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पांच अगस्त तक पूरे भारत में बारिश की कमी 11 प्रतिशत थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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