दुर्लभ रोग से लड़ रही बच्ची के ‘इलाज में देरी’ पर मप्र उच्च न्यायालय ने एम्स-दिल्ली से जवाब मांगा

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दुर्लभ रोग से लड़ रही बच्ची के ‘इलाज में देरी’ पर मप्र उच्च न्यायालय ने एम्स-दिल्ली से जवाब मांगा

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  • Publish Date - July 17, 2026 / 03:30 PM IST,
    Updated On - July 17, 2026 / 03:30 PM IST

इंदौर, 17 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए) टाइप-2 से पीड़ित तीन-वर्षीय बच्ची का इलाज शुरू किए जाने में कथित देरी पर नयी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को हफ्ते भर में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने तीन-वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए बृहस्पतिवार को यह निर्देश दिया।

दिल्ली एम्स के वकील ने न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के लिए एक बार फिर मोहलत मांगी।

याचिकाकर्ता के वकील ने इस गुहार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इंदौर निवासी बच्ची के इलाज के लिए पर्याप्त धनराशि जमा हो गई है, फिर भी एम्स-दिल्ली उसका इलाज शुरू करने में देरी कर रहा है।

अदालत ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए कहा कि एम्स-दिल्ली अपना जवाब 23 जुलाई तक अनिवार्य रूप से दाखिल करे।

अदालत ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की है।

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार से 22 जून को जवाब तलब किया था और राज्य सरकार से यह बताने को कहा था कि वह बच्ची के इलाज में किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं।

उच्च न्यायालय ने रेखांकित किया था कि एसएमए टाइप-2 से पीड़ित बच्ची को तत्काल उपचार की आवश्यकता है।

याचिकाकर्ता के वकील चंचल गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि बच्ची के परिजन अब तक करीब आठ करोड़ रुपये जुटा चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 50 लाख रुपये और विभिन्न लोगों एवं सामाजिक संगठनों से प्राप्त सहयोग राशि शामिल है।

गुप्ता ने कहा, ‘‘बच्ची के इलाज के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाया जाना है। यह इंजेक्शन मंगवाकर उसका इलाज जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ रहा है।’’

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है। इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद ‘मोटर न्यूरॉन’ धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है।

‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं।

भाषा हर्ष सुरेश

सुरेश